Mob justice on a moving bus: Young man beaten by driver, conductor and passengers

Mob justice on a moving bus: Young man beaten by driver, conductor and passengers

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने आम लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है। यह वीडियो एक निजी बस के अंदर का बताया जा रहा है, जहां एक युवक को बस चालक, कंडक्टर और कुछ यात्रियों द्वारा मिलकर पीटा जा रहा है। खुलेआम हुई इस मारपीट ने न केवल मानवता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा कर दी है।

दया की गुहार, लेकिन नहीं पसीजा दिल

वीडियो में दिख रहा दृश्य बेहद विचलित करने वाला है। घटना दिनदहाड़े की बताई जा रही है। बस के भीतर युवक को घेर लिया जाता है और जबरन पकड़कर बस के दरवाजे के पास फर्श पर बैठा दिया जाता है। इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर बारी-बारी से युवक को थप्पड़ मारते नजर आते हैं।

सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि युवक पूरे समय हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगता दिखता है। वह न तो किसी पर हमला करता है और न ही विरोध करता है। इसके बावजूद मारपीट रुकती नहीं। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि युवक पूरी तरह डरा हुआ है, लेकिन उसकी हालत देखकर भी किसी का दिल नहीं पसीजता।

यात्रियों की चुप्पी और भागीदारी

इस घटना में केवल बस स्टाफ ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य यात्री भी युवक पर हाथ उठाते नजर आते हैं। वहीं, कई लोग तमाशबीन बने रहते हैं। कोई भी यह कहता हुआ नहीं दिखता कि मारपीट बंद की जाए या युवक को बचाया जाए।

यह चुप्पी ही इस घटना को और भयावह बना देती है। जब एक व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर अपमानित और पीटा जा रहा हो, और आसपास मौजूद लोग या तो खामोश रहें या हिंसा में शामिल हो जाएं, तो यह समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।

विवाद की वजह अब भी साफ नहीं

अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक और बस स्टाफ के बीच विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई। वीडियो में भी इसकी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आती। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में कानून अपने हाथ में लेना जायज़ नहीं है

कई यूज़र्स ने सवाल उठाया है कि यदि युवक से कोई गलती हुई भी थी, तो उसे सज़ा देने का अधिकार बस चालक या कंडक्टर को किसने दिया?

कानून क्या कहता है

कानूनी जानकारों का कहना है कि बस चालक या कंडक्टर को किसी भी यात्री को शारीरिक रूप से रोकने या पीटने का कोई अधिकार नहीं है। यदि किसी यात्री से विवाद होता है, तो बस स्टाफ अधिकतम पुलिस को सूचना दे सकता है या वाहन रोककर उचित कार्रवाई का इंतजार कर सकता है।

मारपीट, जबरन रोकना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों पर मारपीट, गैरकानूनी हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघन जैसी धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।

सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा पर सवाल

यह घटना निजी बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। रोज़ाना लाखों लोग निजी और सरकारी बसों से सफर करते हैं। ऐसे में अगर बस स्टाफ ही कानून को ताक पर रख दे, तो आम यात्री खुद को कहां सुरक्षित महसूस करेगा?

अक्सर परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा बस स्टाफ के व्यवहार और प्रशिक्षण की बात की जाती है, लेकिन इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही की भारी कमी है

सोशल मीडिया पर गुस्सा और मांग

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में लोग मांग कर रहे हैं कि वीडियो में दिख रहे ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य आरोपियों की पहचान कर तुरंत गिरफ्तारी की जाए

कई लोगों ने इसे “चलती बस में भीड़ का इंसाफ” बताते हुए कहा कि अगर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

पुलिस कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल स्थानीय प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं। हालांकि, वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस पर दबाव बढ़ गया है कि वह स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे।

यह मामला केवल एक युवक की पिटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता और कानून के पालन की परीक्षा है।

एक खतरनाक संदेश

Youth beaten up in a moving bus यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम धीरे-धीरे ऐसी जगह बनते जा रहे हैं, जहां भीड़ खुद जज, जूरी और जल्लाद बन जाती है। सार्वजनिक परिवहन जैसे स्थानों पर हिंसा का यह चलन बेहद खतरनाक संकेत है।

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