झुंझुनूं में ससुर-बहू पर जंगली जानवर का हमला: गांव में हाइना की दहशत, खेत में चारा डालते वक्त हुआ हमला

झुंझुनूं में ससुर-बहू पर जंगली जानवर का हमला: गांव में हाइना की दहशत, खेत में चारा डालते वक्त हुआ हमला

झुंझुनूं जिले के एक शांत गांव में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब खेत में पशुओं के लिए चारा डाल रहे एक बुजुर्ग और उसकी बहू पर अचानक एक जंगली जानवर ने हमला कर दिया। यह घटना जिले के एक छोटे गांव में सामने आई है, जहां ग्रामीण अब हाइना की आशंका से सहमे हुए हैं। हमला इतना अचानक और खतरनाक था कि ससुर-बहू को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया।

खेत में रोजमर्रा का काम और अचानक हमला

यह घटना उस समय घटी जब गांव के निवासी 62 वर्षीय हरिराम और उनकी 28 वर्षीय बहू गीता देवी रोज की तरह अपने मवेशियों को चारा देने खेत पहुंचे थे। जैसे ही दोनों ने चारा डालना शुरू किया, झाड़ियों से अचानक एक जंगली जानवर, जो हाइना जैसा दिख रहा था, उन पर झपट पड़ा।

हड़बड़ाहट में दोनों ने जान बचाने की कोशिश की, लेकिन जानवर ने पहले हरिराम पर हमला कर दिया और उसके बाद गीता देवी को भी घायल कर दिया। दोनों ने शोर मचाया, जिसे सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़े और जानवर को भगाया।

अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर

हमले में हरिराम को हाथ और पीठ में गहरे जख्म आए हैं जबकि गीता देवी को चेहरे और कंधे पर चोटें आई हैं। दोनों को तुरंत पास के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, अब उनकी हालत स्थिर है, लेकिन मानसिक आघात काफी गहरा है।

गांव में दहशत, हाइना की पुष्टि बाकी

घटना के बाद से पूरे गांव में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि पहली बार किसी जानवर ने दिनदहाड़े इस तरह हमला किया है। ग्रामीणों का अंदाजा है कि हमला करने वाला जानवर शायद ‘हाइना’ था, जो आमतौर पर रात में ही सक्रिय होता है।

वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और आसपास के इलाके की तलाशी शुरू कर दी गई है। हालांकि अब तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि हमला हाइना ने ही किया था या कोई और जंगली जानवर था।

वन विभाग की कार्यवाही शुरू

वन विभाग के अधिकारियों ने गांव के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि जब तक जानवर की सही पहचान और पकड़ नहीं हो जाती, लोग अकेले खेतों की ओर न जाएं। साथ ही गांव के बाहरी इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।

विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि नजदीकी जंगलों से जंगली जानवर कभी-कभी भोजन की तलाश में गांव की ओर आ सकते हैं, और गर्मी के दिनों में पानी और शिकार की कमी की वजह से इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

ग्रामीणों की मांग – सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

हमले से डरे ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से गांव में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए जंगल के किनारे वाले गांवों में निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही, वन्यजीवों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे और अलर्ट सिस्टम लगाए जाएं।

क्या कहता है प्रशासन?

झुंझुनूं जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि वन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यदि जरूरत पड़ी तो विशेष टीम गठित कर जंगली जानवर को पकड़ने की कोशिश की जाएगी।


निष्कर्ष
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि इंसान और जानवरों के बीच की दूरी दिनों-दिन घटती जा रही है। जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और संसाधनों की कमी ने जंगली जानवरों को बस्तियों की ओर बढ़ने पर मजबूर कर दिया है। झुंझुनूं की यह घटना न केवल सतर्कता का संदेश देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि गांवों में वन्यजीवों के खतरे से निपटने के लिए ठोस योजना की जरूरत है।

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