वाहिदपुरा PHC में बिगड़ी व्यवस्था: मरीजों की बेबसी और स्टाफ की लापरवाही

वाहिदपुरा पीएचसी में बिगड़ी व्यवस्था: मरीजों की बेबसी और स्टाफ की लेटलतीफी

Jhunjhunu News: वाहिदपुरा (झुंझुनू जिला) के सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, वह निश्चित रूप से चिंता का विषय है। यहां मरीजों को समय पर इलाज नसीब नहीं हो रहा है, और अस्पताल का स्टाफ है कि अपनी ड्यूटी पर आने में भी कोताही बरत रहा है। इस लापरवाही की वजह से बेचारे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला वाकई गंभीर है और इस पर तुरंत ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। आखिर, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी ज़रूरत के साथ इस तरह का खिलवाड़ कैसे किया जा सकता है?

समय की परवाह किसे? स्टाफ का बेधड़क लेट आना

वाहिदपुरा पीएचसी में तो जैसे समय की कोई कीमत ही नहीं! सुबह के 8 बज चुके होते हैं, लेकिन साहब, कई कर्मचारी तो 9:15 तक भी अपनी कुर्सी पर दिखाई नहीं देते। अब सोचिए, जो मरीज सुबह से अपनी बीमारी और तकलीफ लेकर अस्पताल पहुंचा है, वह दवाइयों और इलाज के लिए कब तक इंतजार करे? यह तो सरासर अन्याय है।

डॉक्टर साहब कहां हैं? अस्पताल में चिकित्सकों की कमी

और तो और, अस्पताल में डॉक्टरों की भी कमी महसूस की जा रही है। डॉक्टर के न होने की वजह से फार्मासिस्ट को मरीजों को दवाइयां देनी पड़ रही हैं। अब यह तो कानून के भी खिलाफ है, क्योंकि एक फार्मासिस्ट बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाइयां कैसे दे सकता है? यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि मरीजों को सही और सुरक्षित इलाज मिल सके।

बिना पर्ची के दवाइयों का वितरण: खतरे से खाली नहीं

यहां तो फार्मासिस्ट खुलेआम मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह या पर्चे के दवाइयां बांट रहे हैं। कल को अगर किसी मरीज को उस दवाई से कोई साइड इफेक्ट हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाई देना न केवल गलत है, बल्कि यह मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। आखिर, हर दवा हर किसी के लिए तो नहीं बनी होती!

क्या आप जानते हैं? बिना डॉक्टर के पर्चे के किसी भी तरह की दवा देना कानूनन अपराध है और यह सीधे-सीधे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ है।

मरीजों की पीड़ा: इंतजार और निराशा

देरी और इस तरह की लापरवाही के कारण मरीजों का हाल बेहाल है। बूढ़े और कमजोर लोग, जो पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन्हें दवाइयों के लिए घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। कई तो ऐसे भी हैं जो इंतजार करते-करते थक-हार कर बिना दवाई लिए ही घर लौट जाते हैं। क्या बीतती होगी उन पर, जब उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता होगा? यह सोचकर भी दुख होता है।

अनियमितताओं का अंबार: पंचिंग मशीन से लेकर बीपी मशीन तक सब गोलमाल

अस्पताल में अनियमितताओं की भी कोई कमी नहीं है। यहां की पंचिंग मशीन भी ठीक से काम नहीं कर रही है। स्टाफ का जो डेटा रजिस्टर में दर्ज है, वह मशीन में दिखाए जा रहे डेटा से अलग है। अब ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन कर्मचारी कब आया और कब गया। यानी, ड्यूटी में लापरवाही करने वालों के लिए तो यह मानो सोने पर सुहागा हो गया!

और सुनिए, अस्पताल में तो ब्लड प्रेशर (बीपी) नापने की मशीन तक उपलब्ध नहीं है। अब ज़रा सोचिए, जिन मरीजों को बीपी की जांच कराने की ज़रूरत है, वे कहां जाएं? बीपी मशीन न होने से मरीजों को कितनी परेशानी होती होगी, इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है।

पहले भी उठी थीं शिकायतें, फिर भी वही हाल

अधिकारियों का तो यह भी कहना है कि इस अस्पताल के बारे में पहले भी कई शिकायतें आ चुकी हैं। उन शिकायतों के बाद अस्पताल को नोटिस भी दिया गया था। लेकिन, देखकर लगता है कि उस नोटिस का कोई असर नहीं हुआ, क्योंकि आज भी वही लापरवाही और वही ढर्रा जारी है।

अब आगे क्या होगा? मरीजों को उम्मीद

अधिकारियों ने अब कहा है कि वे इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेंगे। उन्होंने यह भी बताया है कि अस्पताल के लापरवाह स्टाफ को नोटिस जारी किया जाएगा और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई भी की जाएगी। अब मरीजों को उम्मीद है कि शायद अब जाकर अस्पताल की व्यवस्था में कुछ सुधार आएगा और उन्हें समय पर और सही इलाज मिल सकेगा।

आप क्या सोचते हैं? क्या आपके इलाके के सरकारी अस्पतालों में भी सुधार की ज़रूरत है? अपनी राय हमें कमेंट में ज़रूर बताएं।

कार्रवाई का इंतजार: कब सुधरेगी व्यवस्था?

अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही इस मामले में ठोस कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि अस्पताल में सभी ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध हों और मरीजों को बिना किसी देरी के सही इलाज मिले। अब देखना यह है कि यह आश्वासन कब तक हकीकत में बदलता है।

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मिलकर करना होगा काम

वाहिदपुरा पीएचसी में जो लापरवाही सामने आई है, वह एक गंभीर समस्या है। इस समस्या को जितनी जल्दी हो सके ठीक करना बहुत ज़रूरी है। अधिकारियों को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर मरीज को सही समय पर उचित इलाज मिले। हम सभी को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा ताकि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर ज़रूरतमंद को अच्छी और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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