ऑनलाइन ठगी गिरोह ने बनाया बंधक, अमेरिकियों को साइबर फ्रॉड कराने पर किया मजबूर

Americans held hostage by online fraud gang, forced into cyber fraud

दुनिया भर में फैले साइबर अपराध नेटवर्कों के बीच एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने मानव तस्करी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के खतरनाक गठजोड़ को उजागर कर दिया है। थाईलैंड के घने जंगलों के बीच बने एक गुप्त स्कैम कैंप से एक भारतीय युवक को नाटकीय तरीके से छुड़ाया गया। यह युवक लंबे समय से बंधक बनाकर रखा गया था और उसे प्रतिदिन घंटों तक अमेरिकियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।

यह घटना न केवल साइबर अपराधों की भयावहता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय गैंग किस तरह बेरोज़गारी और बेहतर काम के झांसे का फायदा उठाकर युवाओं को अपना निशाना बनाते हैं।

घने जंगलों के बीच शुरू हुआ खौफनाक सफर

पीड़ित युवक की पहचान सुरक्षा कारणों से गोपनीय रखी गई है। जानकारी के अनुसार, उसे एक आकर्षक नौकरी का प्रस्ताव देकर थाईलैंड बुलाया गया था। कहा गया था कि उसे बेहतर सैलरी, रहने-खाने की सुविधा और सुरक्षित माहौल मिलेगा। लेकिन जैसे ही वह देश में पहुंचा, उसका सपना एक भयावह हकीकत में बदल गया।

एजेंट उसे सीधे एक ऐसे कैंप में ले गया जो शहरों से दूर, घने जंगलों के बीच बने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी केंद्र से संचालित होता था। यहां पहुंचने के बाद न तो वापस आने की कोई संभावना थी और न ही बाहर से किसी से संपर्क करने का कोई तरीका।

युवक को रोज़ घंटों तक लैपटॉप पर बैठकर अमेरिकी नागरिकों को फर्जी निवेश योजनाएं, रोमांस स्कैम और फेक कॉल सेंटर्स के जरिए ठगने को मजबूर किया जाता था। यह सब एक हाई-टार्गेट प्रेशर सिस्टम के तहत होता था, जहां हर व्यक्ति से रोज़ाना बड़ी रकम ठगने की उम्मीद की जाती थी।

टार्गेट पूरा न हो तो मिलती थी अमानवीय सज़ा

सूत्रों के अनुसार, यह कैंप पूरी तरह से बंधुआ श्रम की तरह चलता था। यहां मौजूद लोगों पर लगातार दबाव बनाया जाता था कि वे ठगी के जरिए एक निश्चित रकम हासिल करें।

अगर कोई व्यक्ति यह लक्ष्य पूरा न कर पाए—
तो उसे बुरी तरह पीटा जाता,
घंटों भूखा रखा जाता,
या फिर उसे अंधेरे कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया जाता था।

कई पीड़ितों ने बताया है कि वहां मौजूद ‘गार्ड्स’ या ‘हैंडलर्स’ बेहद क्रूर थे। वे लोगों को धमकाकर, डरा-धमकाकर और हिंसा का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करवाते थे। युवक भी इसी चंगुल में फंस गया था और हर दिन जान बचाने के लिए काम करता था।

भारतीय दूतावास, थाई सेना और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

पीड़ित किसी तरह बाहर मदद का संदेश भेजने में सफल हुआ, जिसके बाद उसका मामला भारतीय दूतावास तक पहुंचा। स्थिति की गंभीरता समझते हुए भारतीय अधिकारियों ने तुरंत थाई पुलिस और रॉयल थाई आर्मी से संपर्क किया।

जंगलों में स्थित ऐसे स्कैम कैंप तक पहुंचना बेहद जोखिम भरा होता है।
थाई अधिकारियों ने:

  • इलाके की सैटेलाइट मैपिंग की,
  • कैंप की गतिविधियों की निगरानी की,
  • और फिर एक विशेष ऑपरेशन चलाया।

काफी मुश्किल भरे प्रयास के बाद सुरक्षा बलों ने कैंप को घेरा और युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह पूरी कार्रवाई अत्यंत संवेदनशील थी, क्योंकि ऐसे कैंपों में अक्सर हथियारबंद गार्ड तैनात रहते हैं।

भारत में भर्ती कराने वाला एजेंट गिरफ्तार

पीड़ित के भारत वापस आने के बाद जांच तेज हुई। कड़ी पूछताछ और उपलब्ध सबूतों के आधार पर पुलिस ने उस एजेंट को गिरफ्तार किया है, जिसने युवक को फर्जी नौकरी के नाम पर विदेश भेजा था।

ये एजेंट अक्सर भारत के विभिन्न राज्यों में बेरोज़गार युवाओं को टार्गेट करते हैं और उन्हें हाई-सेलरी वाली नौकरियों का लालच देते हैं।

जांच अधिकारियों के अनुसार:

  • यह एजेंट कई अन्य लोगों को भी इसी तरह थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के साइबर कैंपों तक पहुंचा चुका था।
  • उसके जरिए एक पूरे रैकेट के संचालित होने की आशंका है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच जारी है कि इस गिरोह से जुड़े मुख्य मास्टरमाइंड कौन हैं।

मानव तस्करी + साइबर ठगी = एक नया वैश्विक खतरा

Thailand Scam Rescue यह घटना इस बात की सख्त चेतावनी है कि साइबर अपराध अब सिर्फ कंप्यूटर या मोबाइल तक सीमित नहीं है।
यह मानव तस्करी से जुड़कर एक नया और भयानक रूप ले चुका है, जिसमें लोगों को न सिर्फ नौकरी के नाम पर धोखा दिया जाता है, बल्कि उन्हें डिजिटल गुलामी के लिए मजबूर किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • आर्थिक संकट,
  • बेरोज़गारी,
  • और विदेश में नौकरी का लालच—

इन सभी का फायदा उठाकर ऐसे गैंग तेज़ी से फैल रहे हैं।

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