राजस्थान परिवहन विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: झुंझुनूं और खेतड़ी के DTO कार्यालयों में गड़बड़ी उजागर, तीन अधिकारी निलंबित

"Rajasthan Parivahan Vibhag mein bada farziwada: Jhunjhunu aur Khetri ke DTO karyalayon mein gadbadi ujagar, teen adhikari nilambit"

राजस्थान के परिवहन विभाग में एक बार फिर से भ्रष्टाचार का जिन्न बाहर निकल आया है। इस बार मामला झुंझुनूं और खेतड़ी क्षेत्र के कार्यालयों से जुड़ा है, जहां विभागीय बैकलॉग फाइलों की जांच के दौरान पुराने वाहन नंबरों के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इस खुलासे के बाद खेतड़ी के जिला परिवहन अधिकारी (DTO) समेत तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

बैकलॉग फाइलों की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

राज्य सरकार की ओर से हाल ही में पुराने यानी बैकलॉग फाइलों की व्यापक जांच शुरू की गई थी। यह जांच झुंझुनूं और खेतड़ी स्थित आरटीओ/डीटीओ कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर केंद्रित थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि सैकड़ों फाइलें ऐसी थीं जिनमें पुराने वाहन नंबरों का मनमाना तरीके से आवंटन किया गया था।

कुछ मामलों में तो यह भी सामने आया कि जिन वाहनों को नंबर दिए गए, वे कभी अस्तित्व में ही नहीं थे। इन नंबरों के आवंटन के एवज में अवैध वसूली की भी आशंका जताई जा रही है।

खेतड़ी DTO समेत तीन पर गिरी गाज

जैसे ही यह गड़बड़ियां सामने आईं, विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए खेतड़ी के DTO और दो अन्य संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों पर नियमों को ताक पर रखकर पुराने नंबरों का आवंटन करने, बिना दस्तावेजों की पुष्टि के फाइलों को क्लियर करने और कुछ मामलों में दलालों के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन करने का आरोप है।

परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच कमेटी गठित कर दी गई है। दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।”

सरकार को हुआ लाखों रुपये का नुकसान

इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा असर राज्य सरकार की राजस्व व्यवस्था पर पड़ा है। अनुमान है कि इन गड़बड़ियों के चलते सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। जिन वाहनों का पंजीकरण नियमों के विरुद्ध किया गया, उनसे रोड टैक्स और अन्य शुल्कों की वसूली ही नहीं की गई।

इसके अलावा जिन पुराने नंबरों का उपयोग किया गया, वे सार्वजनिक प्रणाली से हटाए जा चुके थे, जिससे वाहन डेटाबेस में भी गड़बड़ी आई है। अब इन्हें दुरुस्त करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

दलालों की भूमिका पर भी सवाल

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ स्थानीय दलाल भी सक्रिय थे जो पुराने नंबर दिलवाने के नाम पर वाहन मालिकों से बड़ी रकम वसूलते थे। इन दलालों के जरिए ही फर्जी दस्तावेजों का निर्माण और फाइल पास कराना संभव हुआ।

फिलहाल इन दलालों की पहचान की जा रही है और पुलिस की मदद से उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

भविष्य की कार्रवाई और विभागीय सख्ती

फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद परिवहन विभाग अब अन्य जिलों की बैकलॉग फाइलों की भी स्क्रूटनी करने जा रहा है। झुंझुनूं और खेतड़ी के बाद यह प्रक्रिया सीकर, नागौर, चुरु और जयपुर ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू की जाएगी।

विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में बैकलॉग फाइलों को मंजूरी देने से पहले तीन स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत दस्तावेजों की डिजिटल स्कैनिंग, ऑडिट टीम की रिपोर्ट और वरिष्ठ अधिकारी की स्वीकृति जरूरी होगी।

जनता में गुस्सा और सवाल

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आम जनता में भी रोष है। वाहन मालिकों का कहना है कि जब आम लोग नियमों का पालन करते हुए महीनों तक वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया में फंसे रहते हैं, तब अधिकारी कुछ खास लोगों को चंद रुपयों में सारे काम चुटकियों में करवा देते हैं।

एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, व्यवस्था पर से भरोसा तोड़ने वाला मामला है। सरकार को इस पर सख्त रुख अपनाना चाहिए।”

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