राजस्थान में 7 मई की रात कुछ अलग होने जा रही है। अचानक तेज़ सायरन की आवाज़ें सुनाई देंगी, अंधेरा छा जाएगा, और लोगों को घरों की लाइटें बंद करनी होंगी। घबराइए मत — ये किसी खतरे की घंटी नहीं, बल्कि एक मॉक ड्रिल है।
यह अभ्यास केंद्र सरकार की पहल पर हो रहा है और इसका मकसद है—युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियों के लिए आम जनता और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों की जांच करना।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि इस मॉक ड्रिल के दौरान आपको क्या करना है, क्यों किया जा रहा है ये अभ्यास, और कौन-कौन से शहरों को रखा गया है हाई-अलर्ट पर।
1. मॉक ड्रिल कब और क्यों हो रही है?
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद, राजस्थान के 28 शहरों में 7 मई को रात के समय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस दौरान तेज आवाज़ में सायरन बजेंगे और पूरे शहर में ब्लैकआउट यानी अंधेरा कर दिया जाएगा।
इस अभ्यास का उद्देश्य है नागरिकों को यह सिखाना कि अगर कभी हवाई हमला या युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो, तो कैसे सतर्क और सुरक्षित रहना है। साथ ही, सुरक्षा बलों की तैयारियों को भी परखा जाएगा।
2. मॉक ड्रिल के दौरान क्या होगा?
- सायरन बजेगा: यह हवाई हमले की चेतावनी का संकेत होगा।
- ब्लैकआउट: सभी घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों की लाइटें बंद रखनी होंगी।
- लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा: जैसे बंकर या नीचे की मंजिल।
- बचाव के उपाय अपनाने होंगे: प्रशासन द्वारा बताए गए आपातकालीन निर्देशों का पालन करना होगा।
- सामाजिक जागरूकता: मॉक ड्रिल के जरिए आम नागरिकों को जागरूक किया जाएगा कि ऐसी आपात स्थिति में उन्हें क्या करना है।
3. किन शहरों में रहेगी ज्यादा सख्ती?
राजस्थान को इस अभ्यास के लिए तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
- A कैटेगरी: कोटा और रावतभाटा — क्योंकि रावतभाटा में न्यूक्लियर पावर प्लांट है और कोटा उसके बेहद नजदीक है।
- B कैटेगरी: जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर, अलवर, जैसलमेर, भरतपुर, गंगानगर जैसे शहर जहां सैन्य और सामरिक महत्व के संस्थान हैं।
- C कैटेगरी: नागौर, पाली, भीलवाड़ा, ब्यावर, सवाई माधोपुर, जालोर, फुलेरा आदि — ये अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माने गए हैं लेकिन फिर भी ड्रिल में शामिल हैं।
4. जोधपुर में विशेष तैयारियां
जोधपुर में प्रशासन ने मॉक ड्रिल को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यहां नागरिक सुरक्षा विभाग के 400 से ज़्यादा वॉलंटियर घर-घर जाकर लोगों को समझा रहे हैं कि अगर अचानक एयर स्ट्राइक जैसी कोई परिस्थिति आ जाए तो कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।
शहर में 18 जगहों पर सायरन लगाए गए हैं जो एक साथ बजेंगे और लोगों को सतर्क करेंगे।
5. मॉक ड्रिल के दौरान आम जनता को क्या करना चाहिए?
- सायरन बजते ही घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क हो जाएं।
- लाइटें तुरंत बंद कर दें — घर, दुकान, दफ्तर और वाहन की भी।
- सुरक्षित स्थानों की ओर जाएं — जैसे बेसमेंट या बंकर।
- मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों का जरूरत भर ही इस्तेमाल करें।
- किसी अफवाह पर विश्वास न करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
इस मॉक ड्रिल का असली मकसद
ऐसे अभ्यास न सिर्फ सेना और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आम लोगों के लिए भी ज़रूरी हैं। इससे हमें यह समझने का मौका मिलता है कि संकट की घड़ी में संयम और तैयारी कितनी ज़रूरी होती है।
सुरक्षा एजेंसियां मॉक ड्रिल के जरिए यह देखना चाहती हैं कि सिस्टम कितनी जल्दी एक्टिव होता है, और जनता किस हद तक सहयोग करती है।









