उच्च वेतन का झांसा और परदेस में फंसता एक युवा: झुंझुनू की सच्ची दुखद कहानी

A young man lured by the promise of a high salary and trapped abroad: A tragic true story from Jhunjhunu

विदेश में नौकरी करने का सपना अक्सर लोगों के मन में उम्मीद जगाता है—ऊंची तनख्वाह, बेहतर जीवन और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का मौका। लेकिन कई बार, यही सपना किसी खतरनाक जाल जैसा साबित होता है। झुंझुनू जिले के एक युवक की कहानी इस सच्चाई को बेहद दर्दनाक तरीके से सामने लाती है। बड़े वेतन के लालच में वह विदेश तो पहुंचा, लेकिन वहां उसका स्वागत नौकरी और सुरक्षित माहौल से नहीं, बल्कि धोखे और भय से हुआ।

सपनों की शुरुआत: ऊंचे वेतन का चमकता प्रस्ताव

यह युवक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से था और बेहतर आमदनी की तलाश कर रहा था। तभी, उसे Telegram पर एक ऐसा जॉब ऑफर मिला जिसने उसके सपनों को हवा दे दी। बताया गया कि नौकरी Thailand में है, और तनख्वाह स्थानीय स्तर के मुकाबले कई गुना अधिक।
परिवार की स्थिति सुधारने की उम्मीद ने उसे तेजी से फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
उसने यह नहीं सोचा कि यह पेशकश कितनी असल है और कितनी झूठी।

उसी दौरान, शैलेश नामक एक और युवक भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था, हालांकि उसकी यात्रा थोड़ी देर बाद शुरू हुई।

सवालों के बिना सफर

सारी यात्रा की व्यवस्था वही लोग कर रहे थे जिन्होंने नौकरी का ऑफर दिया था।
उसे दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट का टिकट भेजा गया, और वह 9 या 10 अगस्त को यात्रा पर निकल पड़ा।
फ्लाइट बैंकॉक में लैंड हुई।
उसने सोचा था कि बस अब नए जीवन की शुरुआत होने की देर है।

लेकिन असली कहानी तो यहीं से मोड़ लेती है।

जाल की शुरुआत: बैंकॉक से अनजान रास्तों तक

बैंकॉक एयरपोर्ट पर उसे इमिग्रेशन क्लियर कराने में एक अधिकारी ने मदद की।
पहले तो यह सामान्य लगा, लेकिन उस अधिकारी का अत्यधिक हस्तक्षेप और व्यवहार बाद में संदेहजनक साबित हुआ—मानो वह भी इस पूरी साजिश का हिस्सा हो।

एयरपोर्ट के बाहर पहले से एक कार इंतज़ार कर रही थी
युवक को इसमें बैठाकर आगे ले जाया गया।
लेकिन धीरे-धीरे रास्ते बदलने लगे—शहर की जगह घने जंगलों का इलाका दिखाई देने लगा।

रास्ते में उसे कई बार गाड़ियों में बदला गया—20 से 30 बार तक।
हर बार नए लोग, नई कारें, और हर बार स्थिति और भी अस्पष्ट।
इस सफर के दौरान उसे एक और भारतीय युवक भी मिला जो इसी तरह ठगा गया था।

कुछ घंटों बाद उसे अहसास हुआ कि वह थाईलैंड में नहीं, बल्कि म्यांमार की सीमा के अंदर पहुंच चुका है।

अब सब कुछ स्पष्ट था—
वह मानव तस्करों के जाल में फंस चुका था।

पूरी तरह फंस चुका था युवक

न नौकरी, न सुरक्षित जगह, न परिचित भाषा—
सिर्फ अनजाने चेहरे और डर से भरा माहौल।

जिस विदेशी नौकरी का सपना उसने देखा था,
वह एक डरावने बंदी जीवन में बदल गया था।
वह न भाग सकता था, न किसी से मदद मांग सकता था।

उसका परिवार घर पर उसकी अच्छी शुरुआत के सपने देख रहा था—
लेकिन असलियत उन सपनों से कोसों दूर थी।

विदेश नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी: कैसे पहचानें?

Overseas Job Scam यह घटना अकेली नहीं है।
ऐसे सैकड़ों मामले हर वर्ष सामने आते हैं—खासतौर पर नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार और कंबोडिया से जुड़े रैकेटों में।

सावधान रहने के संकेत:

संकेतध्यान देने योग्य बात
बहुत ज्यादा वेतनजितना आकर्षक, उतना संदिग्ध
बिना इंटरव्यू नौकरीअसली कंपनियाँ हमेशा इंटरव्यू लेती हैं
Telegram/WhatsApp पर बातचीतआधिकारिक ईमेल/कंपनी संपर्क नहीं
कंपनी का स्पष्ट पता/वेबसाइट न होनासीधा लाल झंडा
सामने वाले द्वारा टिकट और कागज़ात बनानारैकेट की सामान्य ट्रिक

कैसे बचें:

  • कंपनी का कानूनी सत्यापन करें
  • पासपोर्ट और दस्तावेज़ खुद संभालें
  • कभी भी पैसे देकर नौकरी न लें
  • विदेश जाने से पहले एम्बेसी और MEA पोर्टल पर जांच करें

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