ऑपरेशन सिंदूर: भारत का आतंक के खिलाफ सर्जिकल प्रहार, जानिए कब, कैसे और कहां हुआ हमला

"Operation Sindoor: Bharat ka aatank ke khilaaf surgical prahaar, janiye kab, kaise aur kahaan hua hamla"

भारत ने हाल ही में एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया है। यह नाम जितना प्रतीकात्मक है, इसका मकसद उतना ही निर्णायक। इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने सीमा पार पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला करते हुए एक सख्त संदेश दिया है कि अब आतंक को सहन नहीं किया जाएगा।

इस कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और उससे सटे इलाकों में मौजूद 21 आतंकी अड्डों को निशाना बनाया। चलिए इस पूरे ऑपरेशन को बारीकी से समझते हैं—क्या था इसका मकसद, कब हुआ हमला, और क्यों इसे “सिंदूर” नाम दिया गया?


ऑपरेशन सिंदूर: नाम के पीछे की सोच

सिंदूर‘ शब्द भारतीय संस्कृति में शक्ति, सम्मान और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। यह न सिर्फ एक रंग है, बल्कि भारतीय नारी की आस्था और वीरता का प्रतीक भी है। ऐसे में इस ऑपरेशन को ‘सिंदूर’ नाम देकर भारतीय सेना ने यह संदेश दिया है कि यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि मातृभूमि की रक्षा के लिए उठाया गया एक पवित्र कदम है।


हमले का समय और रणनीति

भारतीय वायुसेना ने यह ऑपरेशन रात लगभग 2:30 बजे शुरू किया। यह समय इसलिए चुना गया क्योंकि उस वक्त दुश्मन की निगरानी सबसे कम होती है और आम नागरिकों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी न्यूनतम रहती है।

इस ऑपरेशन में एडवांस फाइटर जेट्स, ड्रोन और तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल किया गया। हर टारगेट को पहले से चिन्हित किया गया था, और उनके पीछे पूरा खुफिया नेटवर्क सक्रिय था।


21 आतंकी ठिकानों को बनाया गया निशाना

सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में 21 प्रमुख आतंकी ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए। ये ठिकाने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद थे, और इनका इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों द्वारा किया जा रहा था।

इन ठिकानों में हथियार डिपो, ट्रेनिंग कैंप, संचार केंद्र और रणनीतिक ठिकाने शामिल थे। ऑपरेशन में यह सुनिश्चित किया गया कि केवल आतंकी अड्डों को ही निशाना बनाया जाए और आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत का रुख

भारत ने इस ऑपरेशन के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई है। भारतीय अधिकारियों ने बताया कि यह हमला किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ है।

साथ ही, इस ऑपरेशन को Pulwama हमले में शहीद हुए जवानों और देश के अन्य बलिदानी वीरों को एक श्रद्धांजलि के रूप में भी देखा जा रहा है।


जनता का समर्थन और सेना का संकल्प

सोशल मीडिया से लेकर ज़मीन पर देशभर में इस ऑपरेशन को लेकर लोगों में गर्व और जोश का माहौल है। आम जनता ने सेना के इस साहसिक कदम की सराहना की है।

सेना ने भी दोहराया है कि जब तक सीमा पार से आतंक की जड़ें खत्म नहीं होतीं, तब तक ऐसे ऑपरेशन जारी रह सकते हैं।


निष्कर्ष: “शांति की राह, शक्ति के साथ”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि कार्रवाई की नीति पर आगे बढ़ रहा है। यह ऑपरेशन न सिर्फ सैन्य रणनीति का उदाहरण है, बल्कि यह देश की आत्मा—उसकी अस्मिता और सुरक्षा—की रक्षा का भी प्रतीक है।

आतंकवाद के खिलाफ यह निर्णायक कदम आने वाले समय में अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है कि अगर राष्ट्र संकल्प ले ले, तो आतंक की कोई भी ताकत टिक नहीं सकती।

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