NEET UG Exams Centre Live : OMR शीट लेकर भागी छात्रा | Bharatpur | Jhunjhunu News |
इस बार की नीट यूजी परीक्षा, खासकर राजस्थान के भरतपुर और झुंझुनूं जैसे केंद्रों पर, कई स्तरों पर अव्यवस्थाओं और देरी की वजह से चर्चा में आ गई है। परीक्षा वाले दिन छात्रों और अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जब निर्धारित समय के काफी बाद तक परीक्षा केंद्रों से छात्र बाहर नहीं आए। इस पूरी गड़बड़ी का मुख्य कारण बना – बायोमेट्रिक जांच में तकनीकी खामियां।
परीक्षा के दिन की हलचल
रविवार को जब परीक्षा शुरू हुई, तब शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन शाम 5 बजे जैसे ही परीक्षा खत्म होने का समय आया, बाहर खड़े अभिभावकों की बेचैनी बढ़ने लगी। उनका कहना था कि इतने बड़े पैमाने पर देरी पहले कभी नहीं देखी गई। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्हें कड़ी धूप में लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ा क्योंकि बायोमेट्रिक मशीनें या तो धीमी थीं या काम ही नहीं कर रही थीं।
अभिभावकों का गुस्सा फूटा
बढ़ती देरी और अव्यवस्था को देखकर कई अभिभावकों ने केंद्रों के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए यह सवाल उठाया कि आखिर परीक्षा से पहले की जाने वाली बायोमेट्रिक जांच परीक्षा के बाद क्यों की गई? कुछ ने यहां तक आरोप लगाया कि यह परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
बायोमेट्रिक जांच बनी मुख्य विवाद का कारण
पारंपरिक रूप से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन परीक्षा में प्रवेश से पहले होता है, ताकि कोई भी फर्जीवाड़ा न हो। लेकिन इस बार कई केंद्रों पर यह जांच परीक्षा खत्म होने के बाद हुई, जिसने लोगों के बीच असमंजस और अविश्वास की स्थिति पैदा कर दी।
प्रशासन और पुलिस का हस्तक्षेप
स्थिति बिगड़ते देख स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को शांत किया। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी खराबी के चलते बायोमेट्रिक जांच में देरी हुई और अब हालात नियंत्रण में हैं। हालांकि, कई अभिभावक इन स्पष्टीकरणों से संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने जांच की मांग की।
आधिकारिक बयान और कार्रवाई
पुलिस और केंद्र प्रशासन ने कहा कि यह पहली बार है जब इस स्तर पर परीक्षा के बाद बायोमेट्रिक जांच की गई। उन्होंने जांच शुरू करने की बात कही है ताकि स्पष्ट हो सके कि गलती कहां हुई और भविष्य में ऐसी स्थितियों से कैसे बचा जाए।
जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह आश्वासन दिया गया है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
प्रक्रिया पर उठते सवाल
इस घटना ने नीट जैसी बड़ी परीक्षा की तैयारी और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा होता है, तो इस स्तर की तकनीकी चूक न केवल चिंता का विषय है, बल्कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर भी असर पड़ता है।
कुछ महत्वपूर्ण बिंदु जो सामने आए:
- बायोमेट्रिक जांच की योजना में खामी: बायोमेट्रिक व्यवस्था यदि समय पर और सही तरीके से न हो, तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
- तकनीकी व्यवस्था में बैकअप की कमी: इस तरह के एग्जाम में तकनीकी गड़बड़ियों के लिए बैकअप प्लान होना बेहद जरूरी है।
- अभिभावकों के साथ संचार में कमी: केंद्रों पर मौजूद अधिकारियों और अभिभावकों के बीच संवाद की कमी से तनाव और भ्रम की स्थिति बनी रही
आगे क्या?
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देशभर में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की योजना और निष्पादन में और अधिक पारदर्शिता और तैयारी की आवश्यकता है। छात्रों की मेहनत और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जो परीक्षा को सरल, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाएं।
नीट से जुड़ा यह विवाद केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में परीक्षा प्रबंधन को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ देता है। प्रशासन और परीक्षा एजेंसियों को चाहिए कि वे इन घटनाओं से सीखें और भविष्य में ऐसी लापरवाहियों से बचें।









