ममता कुलकर्णी: 23 साल की तपस्या के बाद बनीं महामंडलेश्वर, कहा- ‘अब सब कुछ खत्म हो गया’

Mamta Kulkarni Interview

फिल्मी दुनिया की चमक-दमक को छोड़कर, मानव कल्याण और सनातन धर्म की राह पर चलने वाली ममता कुलकर्णी ने अपने आध्यात्मिक सफर में एक नई मंजिल हासिल की है। किन्नर अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर घोषित किया है। क्या घोषना से उनके जीवन में एक नई शुरुआत हुई है। दैनिक भास्कर के साथ अपने पहले एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ममता ने अपना आध्यात्मिक सफर, संघर्ष और अनुभवों को शेयर किया।

महामंडलेश्वर बनने का सफर

ममता ने बताया कि बॉलीवुड को अलविदा कहकर तपस्या और साधना का रास्ता कैसे चुना। अन्होने कहा, “मैंने 22-23 साल की तपस्या के बाद महामंडलेश्वर का पद हासिल किया है। ये मेरे लिए बिल्कुल वैसा है जैसे एक लड़की सालों की मेहनत के बाद डॉक्टर बनती है।”

लेकिन उनके महामंडलेश्वर बनने पर कुछ विवाद भी खड़े हो गए। काई संतो ने इस पर आपत्ति जताई। ममता ने इसपर सफाई देते हुए कहा कि किन्नर अखाड़े की स्वतंत्रता और संतुलित दृष्टि ने उन्हें यहां जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

आपने किन्नर अखाड़ा ही क्यों चुना?

ममता ने कहा, “डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का किन्नर अखाड़ा एक स्वतंत्र अखाड़ा है जहां किसी की भी तरह कोई बंदिश नहीं है। यहां योगी और योगिनी को हर तरह की आजादी है। मैं किसी भी धार्मिक सम्मेलन, चरित्र या समारोह में जा सकती हूं।” हूं। यहां ब्रह्मा और क्रिया विद्या के साथ साधना की जाती है।”

शादी के सवाल पर ममता का जवाब

जब ममता से उनकी शादी के बारे में पूछा गया तो उन्हें जल्दबाजी में कहा गया, “हे भगवान! अब संन्यास लेने के बाद शादी का सवाल ही नहीं उठता। अब ये सब कुछ खत्म हो गया है। कल जब मुझे महामंडलेश्वर घोषित किया गया तो ये सवाल भी अपने आप ख़तम हो गया।”

तपस्या का त्याग और भावुक पल

ममता महामंडलेश्वर बनने के समय भावुक हो गई थी। अन्होने कहा, “ये मेरे लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने जैसा था। मेरी 23 साल की तपस्या की अंतिम आहुति आज पूरी हो गई। हमारे समय की भावनाएं शब्दों में बयां करना मुश्किल है।”

दिनचर्या और ध्यान का महत्व

ममता ने अपने दिनाचार्य और ध्यान के महत्व पर भी रोशनी डाली। अन्होने कहा, “मैं हमेशा सुबह 4 बजे उठती हूं। ध्यान और समाधि के अभ्यास के कारण मेरी नींद अब बहुत हल्की हो गई है। अब ये मेरी जिंदगी का एक हिस्सा बन चूका है।”

ममता कुलकर्णी का फिल्मी करियर

ममता कुलकर्णी का बॉलीवुड करियर 1990 के दशक के दौर में अपने चरम पर था। अपनी खूबसूरती और बोल्ड इमेज के लिए मशहूर ममता ने कई हिट फिल्मों में काम किया। उनका करियर छोटा उमर में ही शुरू हो गया था, और उन्हें बॉलीवुड में अपना अलग ही प्रभाव छोड़ा। यहां उनके करियर के कुछ महत्वपूर्ण हाइलाइट्स दिए गए हैं:

बॉलीवुड में एंट्री

ममता कुलकर्णी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1992 में फिल्म तिरंगा से की थी, जो एक देशभक्ति ड्रामा थी। फिल्म में उनका रोल छोटा था, लेकिन उनकी खूबसूरती और स्क्रीन प्रेजेंस ने सबका ध्यान खींच लिया।

ब्लॉकबस्टर फिल्में

ममता ने 1990 के दशक की सुपरहिट फिल्मों में काम किया, जैसे:

  • आशिक आवारा (1993): इस फिल्म के लिए ममता को सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
  • बाज़ी (1995): आमिर खान के अपोजिट ममता का रोल बहुत पसंद किया गया।
  • करण अर्जुन (1995): सलमान खान और शाहरुख खान के साथ यह ब्लॉकबस्टर फिल्म थी, जिसमें उनका छोटा लेकिन प्रभावशाली रोल था।
  • सबसे बड़ा खिलाड़ी (1995): अक्षय कुमार के अपोजिट उनकी ये फिल्म एक बड़ी हिट रही।

बोल्ड और ग्लैमरस छवि

ममता अपनी बोल्ड और ग्लैमरस इमेज के लिए काफी चर्चा में हैं। उनका 1993 का स्टारडस्ट मैगज़ीन कवर, जिसने उन्हें टॉपलेस पोज़ दिया था, एक बड़ा विवाद बन गया था। क्या विवादों के बाद ममता और भी ज्यादा लाइमलाइट में आ गई हैं।

बॉलीवुड से अलविदा

ममता का बॉलीवुड करियर 2000 के बाद धीरे-धीरे गिरने लगा। अनहोनी अपनी आखिरी फिल्म कभी तुम कभी हम (2002) में काम किया। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया और आध्यात्मिकता की तरफ अपना रुख कर लिया।


90 के दशक का प्रतिष्ठित सिताराममता कुलकर्णी 1990 के दशक की प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में से एक थीं, जो अपने अलग स्टाइल और एटीट्यूड के लिए मशहूर थीं। उन्हें बॉलीवुड में अपना एक अलग ही दौर छोड़ा जो आज भी याद किया जाता है।

ममता का सफर बॉलीवुड से ले कर आध्यात्म तक काफी दिलचस्प रहा, और उनकी फिल्मों की यादें आज भी उनके प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं।

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