झुंझुनूं जिले के खेतड़ी क्षेत्र में उस समय दहशत फैल गई, जब एक तेंदुआ आबादी वाले इलाके में घुस आया और एक घर के भीतर दो सगे भाइयों पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल मुआवजा देने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। यह घटना एक बार फिर इलाके में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है।
सुबह-सुबह खौफनाक मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना तड़के सुबह की है, जब गांव का माहौल पूरी तरह शांत था। इसी दौरान पास की पहाड़ियों और जंगल क्षेत्र से निकलकर एक तेंदुआ भोजन या पानी की तलाश में रिहायशी इलाके की ओर आ गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि जंगल का यह शिकारी सीधे एक घर में घुस जाएगा।
घर के अंदर मौजूद दो भाई अचानक तेंदुए के सामने आ गए। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते या बचाव कर पाते, तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से घर में अफरा-तफरी मच गई। तेंदुए ने दोनों भाइयों को पंजों और दांतों से घायल कर दिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों की सूझबूझ से बची जान
ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए शोर मचाया और लाठियों तथा अन्य साधनों की मदद से तेंदुए को डराने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद तेंदुआ मौके से भागकर पास के जंगल क्षेत्र की ओर चला गया। हालांकि तब तक दोनों भाई बुरी तरह घायल हो चुके थे।
घायल भाइयों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों के शरीर पर गहरे जख्म हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना के बाद से परिवार सदमे में है और गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
गांव में आक्रोश, प्रशासन से दो टूक मांग
तेंदुए के हमले की खबर फैलते ही गांव के बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ नजर आई। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब जंगली जानवर आबादी में घुसे हों। पहले भी कई बार तेंदुए और अन्य वन्यजीव गांव के आसपास देखे जा चुके हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखीं—
तत्काल मुआवजा:
घायल भाइयों के इलाज पर हो रहे खर्च और कामकाज ठप होने से परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार और वन विभाग तुरंत उचित आर्थिक सहायता प्रदान करें।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम:
गांव के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाने और आबादी वाले क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
वन विभाग की सक्रियता, लेकिन डर बरकरार
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही। वन विभाग का कहना है कि खेतड़ी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति तेंदुओं के प्राकृतिक आवास के करीब है, इसलिए कभी-कभी उनका आबादी की ओर आना स्वाभाविक हो जाता है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी माना कि हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी चिंता का विषय है। तेंदुए की तलाश और उसकी गतिविधियों पर निगरानी के लिए टीमों को तैनात किया गया है। ग्रामीणों को फिलहाल रात के समय घरों से बाहर न निकलने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
संरक्षण और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
यह घटना केवल एक परिवार या एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की ओर इशारा करती है। एक ओर वन्यजीव संरक्षण जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल क्षेत्रों के सिमटने, भोजन की कमी और पानी के स्रोत घटने के कारण तेंदुए जैसे जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है, जिसमें वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के साथ-साथ गांवों की सुरक्षा के लिए आधुनिक उपाय किए जाएं।
भय के साए में गांव
“Khetri leopard attack” फिलहाल खेतड़ी का यह गांव भय के माहौल में जी रहा है। लोग बच्चों और बुजुर्गों को लेकर खासतौर पर चिंतित हैं। शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता है और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं। जब तक तेंदुए की लोकेशन पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती या उसे सुरक्षित तरीके से जंगल की गहराई में नहीं भेजा जाता, तब तक ग्रामीणों का डर खत्म होना मुश्किल है।









