झुंझुनू में बुजुर्ग के साथ हैवानियत: गौशाला विवाद ने लिया खौफनाक मोड़, गांव में फैली दहशत

"Jhunjhunu mein buzurg ke saath haiwaniyat: Gaushala vivaad ne liya khaufnaak mod, gaav mein phaili dahshat"

राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। बाकरा गांव के एक बुजुर्ग, रघुवीर सिंह खचड़, ने कुछ गांववालों पर न केवल मारपीट और अपहरण का आरोप लगाया है, बल्कि यह भी कहा है कि उनके साथ कुकर्म करने की कोशिश की गई। यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

गांव की गौशाला बना विवाद की जड़

रघुवीर सिंह का कहना है कि वह गांव की गौशाला के सदस्य रहे हैं और हमेशा पारदर्शिता की मांग करते आए हैं। उनका आरोप है कि गौशाला से जुड़े कुछ लोग चंदा तो लेते हैं, लेकिन उसका कोई हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं करते।

उन्होंने बताया कि एक समय पर “भामू जी” नामक व्यक्ति ने गौशाला को 11 लाख रुपये दान किए थे। लेकिन जब वह पंचायत चुनाव हार गए, तो गौशाला के ही कुछ सदस्यों ने उनसे पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए। इसी बात पर गांव में मीटिंग बुलाई गई, जिसमें खूब बहस हुई। रघुवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने भी गौशाला को ₹11,000 का योगदान दिया था, लेकिन उन्हें न तो रसीद दी गई और न ही कोई हिसाब दिखाया गया।

अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए रघुवीर सिंह ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और गौशाला के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए। यहीं से मामला और बिगड़ गया।

दुकानदार को बनाया निशाना

रघुवीर सिंह का आरोप है कि 9 तारीख को कुछ लोग उनकी दुकान पर पहुंचे और बिना किसी पूर्व चेतावनी के उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोपियों में मंजराम थोरी, सुरेश काजला, जगदीश थोरी, नरोत्तम थोरी, महेंद्र उर्फ कालू थोरी, रामेश्वर थोरी और महावीर थोरी शामिल हैं।

बुजुर्ग का दावा है कि उन्हें जबरन उठाकर केस थोरी नामक व्यक्ति के घर ले जाया गया, जहां उन्हें पैसे चोरी करने की झूठी बात स्वीकारने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, रघुवीर सिंह के मुताबिक उनके कपड़े उतारे गए और उनके साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि उन्हें करीब 150 मीटर तक सड़क पर घसीटा गया।

परिजनों की मदद से बची जान

रघुवीर सिंह का कहना है कि अगर उनके परिवार वाले समय पर नहीं पहुंचते, तो शायद उनकी जान पर भी बन आती। परिजनों ने किसी तरह उन्हें बचाया और पुलिस को सूचना दी। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई पर भी कई सवाल उठे हैं।

पुलिसिया लापरवाही या दबाव?

रघुवीर सिंह ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद भी 46 घंटे तक उनका मेडिकल नहीं करवाया। इससे उन्हें शक है कि पुलिस पर किसी प्रकार का दबाव है या जानबूझकर मामले को टालने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने राजस्थान के गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, आईजी और एसपी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। इसके साथ ही उन्होंने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

प्रशासन का क्या कहना है?

पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारी यह जरूर कह रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है।

गौशाला की सच्चाई पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में गौशाला की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। रघुवीर सिंह का दावा है कि सरकार द्वारा 285 गायों के लिए मिलने वाले अनुदान के बावजूद, गौशाला में केवल 85 ही जानवर मौजूद हैं। अगर यह आरोप सही निकलता है, तो यह सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पशु कल्याण से भी खिलवाड़ है।

रघुवीर सिंह ने यह भी कहा कि गौशाला के नाम पर कुछ लोग गांववालों का “गला काट” रहे हैं। यह कथन केवल नाराज़गी नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक समस्या की ओर इशारा करता है।


आगे क्या?

इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। अगर बुजुर्ग के आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं प्रशासनिक तंत्र किसी दबाव में तो काम नहीं कर रहा।

यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पारदर्शिता, न्याय और इंसानियत की कितनी आवश्यकता है। अगर समाज के सबसे बुजुर्ग और सम्मानित सदस्य को इस तरह अपमानित और प्रताड़ित किया जा सकता है, तो हम किस दिशा में जा रहे हैं?

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