शेखावाटी अंचल को दहला देने वाले झुंझुनूं गैंगवार मामले में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। इस सनसनीखेज हिंसा के कथित मास्टरमाइंड ने आखिरकार अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। यह वही मामला है, जिसकी जड़ किसी आपराधिक गिरोह की पुरानी रंजिश नहीं, बल्कि परिवार के भीतर चल रहा एक कड़वा ज़मीन विवाद बताया जा रहा है। 24 बीघा पुश्तैनी ज़मीन को लेकर शुरू हुआ यह टकराव धीरे-धीरे इतना बढ़ा कि बात खुलेआम गोलियों और दो लोगों की मौत तक जा पहुंची।
24 बीघा ज़मीन बना खून-खराबे की वजह
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत सीकर जिले के भड़वासी गांव में स्थित 24 बीघा ज़मीन से हुई। आरोपी श्रवण भड़वासी और उसकी भाभी शारदा के बीच लंबे समय से इस ज़मीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। पारिवारिक स्तर पर सुलझाया जा सकने वाला यह मामला समय के साथ कानूनी और फिर आपराधिक रूप लेने लगा।
बताया जाता है कि महीनों तक दोनों पक्षों के बीच तनातनी बनी रही। पंचायत, समझाइश और आपसी बातचीत की कोशिशें नाकाम होती रहीं। इसी दौरान इस विवाद में एक नया और खतरनाक मोड़ तब आया, जब कुख्यात हिस्ट्रीशीटर रविंद्र कटेवा की एंट्री हुई।
परिवार से निकलकर गैंगवार तक पहुंचा मामला
पुलिस की जांच में सामने आया है कि रविंद्र कटेवा की नजर भी इस कीमती ज़मीन पर थी। उसने कथित तौर पर इस पारिवारिक विवाद में दखल देना शुरू किया, जिससे हालात और बिगड़ते चले गए। यहीं से यह घरेलू झगड़ा एक संगठित गैंगवार में तब्दील हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, श्रवण भड़वासी ने अपने विरोधियों को खत्म करने के लिए करीब 50 लाख रुपये की सुपारी दी। इस साजिश के तहत स्थानीय अपराधियों और गिरोहों को जोड़ा गया, जिनमें “0056” गैंग से जुड़े कुछ नाम भी सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि पूरी योजना बेहद सुनियोजित थी और इसका मकसद ज़मीन पर पूरी तरह कब्जा जमाना था।
खिरोड़ गांव में खूनी टकराव
इस टकराव की सबसे भयावह तस्वीर खिरोड़ गांव में देखने को मिली, जहां योजनाबद्ध तरीके से घात लगाकर हमला किया गया। अचानक हुई फायरिंग से गांव में अफरा-तफरी मच गई। गोलियों की आवाज से लोग घरों में दुबक गए और चारों ओर दहशत का माहौल बन गया।
इस गोलीकांड में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर कृष्णकांत उर्फ गोलू स्वामी और सुनील सुंडा शामिल थे। हालांकि इस हमले का मुख्य निशाना माना जा रहा रविंद्र कटेवा किसी तरह जान बचाने में सफल रहा। उसकी जान बच जाना ही आगे चलकर जांच के लिए एक अहम कड़ी साबित हुआ।
पुलिस का बड़ा एक्शन, कई थानों में अलर्ट
घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। झुंझुनूं और आसपास के जिलों में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया। पांच से ज्यादा थानों की पुलिस टीमों ने मिलकर छापेमारी अभियान शुरू किया। संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने गैंग से जुड़े सहयोगियों, हथियार सप्लायरों और भागने में मदद करने वालों की तलाश तेज कर दी। इस दौरान “0056” गैंग और अन्य स्थानीय आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई नाम जांच के दायरे में आए। लगातार बढ़ते दबाव के कारण आरोपियों का नेटवर्क कमजोर पड़ने लगा।
मास्टरमाइंड का सरेंडर
पुलिस की सख्ती और लगातार घेरेबंदी के बीच आखिरकार इस पूरे गैंगवार के कथित मास्टरमाइंड ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उसका सरेंडर इस मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। इससे जहां पुलिस की लंबे समय से चल रही तलाश खत्म हुई, वहीं अब कानूनी प्रक्रिया का एक नया चरण शुरू हो गया है।
अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब उससे गहन पूछताछ की तैयारी कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुपारी की रकम कहां से आई, हथियारों की व्यवस्था कैसे हुई और इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था।
अब कोर्ट में चलेगी लड़ाई
Jhunjhunu gang war case पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब उनका फोकस ज़मीन विवाद से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच, पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने और वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों की बरामदगी पर है। इसके साथ ही फरार आरोपियों और मददगारों की तलाश भी जारी है।
यह मामला एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर करता है कि राजस्थान के कई इलाकों में ज़मीन विवाद किस तरह हिंसक गैंगवार का रूप ले लेते हैं। परिवार की आपसी लड़ाई जब अपराधियों के हाथ लगती है, तो उसका अंजाम अक्सर खून-खराबे और लंबे कानूनी संघर्ष के रूप में सामने आता है।









