झुंझुनू में 14 वर्षीय बालिका के लिए इंसाफ की लड़ाई: बेबस मां की गुहार — “मुझे मरने की इजाज़त दे दो”

The fight for justice for a 14-year-old girl in Jhunjhunu: A helpless mother pleads, "Allow me to die."

राजस्थान के झुंझुनू ज़िले से एक ऐसी दर्दनाक कहानी सामने आई है जिसने हर संवेदनशील इंसान के दिल को झकझोर दिया है। यहां एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की और उसकी विधवा मां बीते दो महीनों से न्याय की दर-दर ठोकरें खा रही हैं। बेटी के साथ हुई अमानवीय घटना के बाद परिवार लगातार प्रशासन और पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पीड़ित मां ने कलेक्टर से खुद को मरने की अनुमति तक मांग ली है।

घटना की शुरुआत: 17 सितंबर का काला दिन

मामला 17 सितंबर 2024 का है। झुंझुनू जिले के एक गांव में रहने वाली 14 साल की बालिका को कथित रूप से कुछ युवकों ने एक सुनसान जगह — “शर्मन के कुएं” — पर ले जाकर उत्पीड़न किया। लड़की की मां के मुताबिक, चार से पाँच युवक इस वारदात में शामिल थे। इनमें मарамपुर गांव के अंकुर और अनूप, तथा उनके ही गांव के आर्यन और शर्मन के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि ये युवक मोटरसाइकिल से लड़की को कुएं तक ले गए।

यही नहीं, घटना के बाद भी आरोपियों की धमकियां जारी रहीं। उन्होंने लड़की को कई बार फोन कर रात के एक या दो बजे फिर से मिलने के लिए कहा। मना करने पर उन्होंने उसकी मां को जान से मारने की धमकी दी। पिता के न रहने से पहले ही सहमी हुई बच्ची इन धमकियों से पूरी तरह डर गई थी। आरोपियों ने उसे डराने के लिए अपशब्द कहे, गंदे वीडियो दिखाए और चुप रहने की हिदायत दी।

बेटी ने खोली आपबीती — मां की रूह कांप उठी

करीब एक महीने बाद, 23 अक्टूबर 2024 को लड़की ने साहस जुटाकर मां को पूरी घटना बताई। मां ने बताया कि उस दिन बेटी दूध डेयरी जाने का बहाना बनाकर निकली थी। वहीं पर एक आरोपी ने उसे फिर धमकाया और कहा कि शाम को “शर्मन के कुएं” पर नहीं आई तो मां को मार दिया जाएगा। उसने लड़की को याद दिलाया कि उसके पिता अब नहीं हैं जो उसकी रक्षा कर सकें।
बेटी की यह बात सुनते ही मां के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह रोते हुए बोलीं, “मुझे लगा जैसे मेरी आत्मा शरीर से निकल गई।”
मां ने यह भी बताया कि शर्मन नामक व्यक्ति अक्सर उनके घर दूध देने आता था और परिवार उसे ‘काकी’ कहकर आदर से बुलाता था। वह करीब 50-55 साल का है और उसकी पत्नी जयपुर पुलिस में कार्यरत है। यह जानकर परिवार और डर गया क्योंकि उन्हें लगा कि पुलिस में रिश्तों के कारण आरोपी को बचा लिया जाएगा।

पुलिस में रिपोर्ट, लेकिन न्याय अभी अधूरा

अगले ही दिन 24 अक्टूबर को मां ने शर्मन से सीधे बात की और पूछा, “शर्म करो, एक 14 साल की बच्ची के साथ ऐसा कैसे कर सकते हो?”
लेकिन आरोप है कि शर्मन ने उन्हें और डराया। उसने कहा, “मेरे पास बहुत पैसा है, और मेरी पत्नी पुलिस में है — तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।”
25 अक्टूबर को पीड़ित परिवार ने पुलिस में औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करवाई। उसी दिन शर्मन और अंकुर को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन शाम तक दोनों को रिहा कर दिया गया। यह देखकर परिवार पूरी तरह टूट गया। मां ने कहा, “जिन्हें हमने अपनी बेटी के साथ अत्याचार का जिम्मेदार बताया, वही कुछ घंटों में बाहर घूम रहे थे।”

पुलिस ने केवल इतना कहा कि “हम जांच कर रहे हैं,” लेकिन पीड़ित परिवार के अनुसार कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी कैसे रिहा हो गए?

न्याय के लिए भटकती मां-बेटी

मां अपनी बेटी के साथ न्याय की गुहार लेकर सुलताना थाने से लेकर चिड़ावा डीएसपी कार्यालय, झुंझुनू एसपी ऑफिस और यहां तक कि कलेक्टर तक जा चुकी हैं। हर जगह उन्होंने अपनी पीड़ा सुनाई, बयान दिए, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
मां ने बताया कि एसपी कार्यालय में जब उनसे पूछा गया कि कितने आरोपी पकड़े गए हैं, तो उन्होंने बताया कि चार लोग — अंकुर, आर्यन, अनूप और शर्मन — पकड़े गए थे। मगर कुछ ही घंटों बाद सब को छोड़ दिया गया।

और तो और, परिवार को मदद करने वाले एक स्थानीय व्यक्ति को भी पुलिस ने पूछताछ के नाम पर हिरासत में ले लिया। वह वही व्यक्ति था जिसने मां को थाने तक छोड़ा था। मां ने सवाल उठाया, “क्या किसी की मदद करना अब गुनाह है? जो मेरी मदद कर रहा था, वही अब पुलिस के निशाने पर है।”

असहायता और डर से घिरी एक मां

Jhunjhunu Balika Nyay विधवा मां पर अब जिम्मेदारी का पहाड़ टूट पड़ा है। बूढ़े ससुर-सास और तीन बच्चों की देखभाल वही अकेले कर रही हैं। परिवार के अनुसार, आरोपी युवक खुलेआम गांव में घूमते हैं और ताना मारते हैं — “क्या बिगाड़ लिया हमारा? हमें तो उसी दिन छोड़ दिया गया।”
यह बातें सुनकर मां और बेटी दोनों मानसिक रूप से टूट चुकी हैं। मां ने कहा, “मुझे अपनी जान का डर है, मेरे बच्चे छोटे हैं, मैं क्या करूं?”

“अगर न्याय नहीं मिलेगा, तो मरने दो मुझे”

न्याय की उम्मीद जब पूरी तरह टूट गई, तो मां ने प्रशासन से एक दर्दनाक निवेदन किया — “अगर मेरी बात नहीं सुनी जाएगी, तो मुझे मरने की इजाजत दे दो।”
कलेक्टर के समक्ष रोते हुए उसने कहा, “मेरी बच्ची की पीड़ा अब मुझसे देखी नहीं जाती। मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूं, मुझे मरने दो। मेरे पति नहीं हैं, दो बेटियां और एक बेटा है। खेती-बाड़ी और पशुपालन से किसी तरह घर चलाती हूं। अब यह दर्द और नहीं सहा जाता।”

Scroll to Top