Jasrapur youth commits suicide, area shaken by allegations of harassment and unpaid wages

Jasrapur youth commits suicide, area shaken by allegations of harassment and unpaid wages

राजस्थान के सीकर जिले से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जस्रापुर गांव के एक युवा मजदूर ने कथित रूप से मानसिक प्रताड़ना और मेहनताना न मिलने की पीड़ा से तंग आकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

परिवार के अनुसार, युवक सीकर में काम करके अपने घर की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभाल रहा था। वह मेहनती और जिम्मेदार था, लेकिन बीते कुछ समय से वह भीतर ही भीतर टूटता जा रहा था। परिजनों का कहना है कि काम के बदले उसे समय पर मजदूरी नहीं दी जा रही थी और ऊपर से उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। यही दबाव धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि उसने यह कठोर कदम उठा लिया।

पिता की शिकायत से सामने आई पूरी कहानी

मामला तब सामने आया जब मृतक के पिता ने स्थानीय थाने में पहुंचकर अपने बेटे की मौत को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका बेटा सीकर में रोजगार के लिए गया था, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सके। शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन बाद में हालात बदलने लगे।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बेटे के नियोक्ताओं ने बार-बार उसकी मजदूरी देने से इनकार किया। जब वह अपने पैसे मांगता, तो उसे टाल दिया जाता या डराया-धमकाया जाता था। पिता का कहना है कि आर्थिक तंगी के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना ने उनके बेटे को अवसाद में धकेल दिया। परिवार को विश्वास है कि अगर समय पर भुगतान और सम्मानजनक व्यवहार मिलता, तो आज उनका बेटा जीवित होता।

पुलिस जांच में जुटी, आत्महत्या के लिए उकसाने का पहलू अहम

पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण आत्महत्या सामने आया है, लेकिन अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या युवक को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था।

जांच के तहत पुलिस कई पहलुओं पर काम कर रही है। सबसे पहले मृतक के रोजगार से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मजदूरी वास्तव में बकाया थी या नहीं। इसके साथ ही, उसके साथ काम करने वाले अन्य कर्मचारियों और संभावित गवाहों से पूछताछ की जा रही है, जिससे मानसिक उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि हो सके।

पुलिस यह भी देख रही है कि युवक ने कोई सुसाइड नोट, मोबाइल संदेश या अन्य डिजिटल साक्ष्य छोड़े हैं या नहीं, जो उसके मानसिक हालात और दबाव की ओर इशारा करते हों। अधिकारियों का कहना है कि यदि उत्पीड़न या दबाव के ठोस प्रमाण मिले, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मजदूरों की हकीकत पर सवाल

यह घटना एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जिससे देश के कई असंगठित और प्रवासी मजदूर रोज जूझते हैं। काम के बदले उचित मेहनताना न मिलना, अपमानजनक व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना — ये समस्याएं अक्सर सामने आती हैं, लेकिन कई बार डर या मजबूरी के कारण मजदूर आवाज नहीं उठा पाते।

जस्रापुर के इस युवक की मौत केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल है। यह दिखाता है कि जब कानून और सामाजिक जिम्मेदारियां जमीनी स्तर पर लागू नहीं होतीं, तो उसका सबसे बड़ा खामियाजा कमजोर वर्ग को भुगतना पड़ता है।

गांव में मातम, न्याय की मांग

जस्रापुर गांव में युवक की मौत के बाद शोक का माहौल है। परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। मां-बाप बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि उनके बेटे की गलती क्या थी — मेहनत करना या अपने हक की मजदूरी मांगना?

परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और तेज़ जांच हो तथा दोषियों को सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह उजड़ने से बच सके।

प्रशासन का भरोसा

Jasrapur youth commits suicide प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। उनका कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि युवक को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया या उसकी मजदूरी जानबूझकर रोकी गई, तो जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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