1,600-km chase: After 9 days, Jaipur police nab jewellery showroom robbery accused

1,600-km chase: After 9 days, Jaipur police nab jewellery showroom robbery accused

झोटवाड़ा इलाके में ज्वेलरी शोरूम में हुई सनसनीखेज लूट के मामले में जयपुर पुलिस ने आखिरकार बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। नौ दिनों तक चले एक व्यापक और चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई तीन राज्यों में फैली, करीब 1,600 किलोमीटर लंबी उस तलाश का नतीजा है, जिसमें आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग—दोनों का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।

यह मामला सिर्फ एक लूट की जांच नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि आज के दौर में अपराधी चाहे कितनी भी तेजी से जगह बदल लें, डिजिटल निगरानी और सतत फील्डवर्क के सामने ज्यादा देर तक बच पाना आसान नहीं रहा।

सुराग जोड़ने की जटिल प्रक्रिया

वारदात के बाद शुरुआती घंटों में पुलिस के सामने चुनौती साफ थी—आरोपी भीड़भाड़ वाले इलाके में लूट को अंजाम देकर शहर की ट्रैफिक में गुम हो चुका था। ऐसे में सीधी सूचना या चश्मदीद गवाहों से बहुत कुछ हासिल होना संभव नहीं था। इसी वजह से पुलिस ने तकनीकी जांच पर पूरा फोकस किया।

विशेष टीमों ने झोटवाड़ा की तंग गलियों से लेकर शहर से बाहर जाने वाले प्रमुख हाईवे तक लगे करीब 950 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। यह काम किसी एक स्थान तक सीमित नहीं था। कैमरों के हजारों घंटों के वीडियो को बारीकी से देखा गया, समय-रेखा बनाई गई और हर छोटे-बड़े दृश्य को आपस में “सिलाई” की तरह जोड़कर आरोपी की मूवमेंट समझी गई।

इसी प्रक्रिया के दौरान पुलिस को उस वाहन की पहचान हुई, जिसका इस्तेमाल वारदात के बाद भागने में किया गया था। यहीं से जांच को एक ठोस दिशा मिली।

1,600 किलोमीटर का पीछा

जैसे-जैसे फुटेज और तकनीकी डेटा सामने आता गया, आरोपी की लोकेशन बदलती रही। वह एक राज्य से दूसरे राज्य की ओर बढ़ता गया, शायद इस उम्मीद में कि पुलिस का शिकंजा ढीला पड़ जाएगा। लेकिन जयपुर पुलिस ने पीछा नहीं छोड़ा।

लगातार बदलते रूट, अलग-अलग जिलों की सीमाएं और समय का दबाव—इन सबके बीच पुलिस टीमों ने समन्वय बनाए रखा। अलग-अलग राज्यों की पुलिस और स्थानीय एजेंसियों से तालमेल बैठाया गया, ताकि आरोपी पर हर मोड़ पर नजर रखी जा सके।

करीब नौ दिनों तक चला यह अभियान पुलिस के लिए शारीरिक और मानसिक, दोनों रूपों में थकाने वाला था। फिर भी, किसी भी स्तर पर जल्दबाजी या चूक से बचते हुए टीम ने पूरी सतर्कता के साथ कदम बढ़ाए।

वारदात जिसने कारोबारियों को झकझोर दिया

झोटवाड़ा की यह ज्वेलरी शोरूम लूट स्थानीय व्यापारियों के लिए भी बड़ा झटका थी। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के तुरंत बाद बाजारों में दहशत का माहौल था और कारोबारी वर्ग पुलिस से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहा था।

इसी दबाव के बीच जयपुर पुलिस ने कई टास्क फोर्स गठित कीं—कुछ टीमें तकनीकी निगरानी में जुटीं, तो कुछ ने जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत किया। संदिग्ध ठिकानों की जांच, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का विश्लेषण और डिजिटल ट्रेल—हर पहलू पर एक साथ काम किया गया।

गिरफ्तारी और आगे की जांच

आखिरकार, जब आरोपी की लोकेशन को लेकर पुख्ता जानकारी मिल गई, तब पुलिस ने बिना किसी शोर-शराबे के उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई, जिससे यह साफ है कि ऑपरेशन को पूरी रणनीति के साथ अंजाम दिया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लूटे गए सामान की बरामदगी और आरोपी से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस वारदात में कोई और व्यक्ति शामिल था या आरोपी अकेले ही पूरी योजना को अंजाम दे रहा था।

निगरानी तंत्र की बढ़ती भूमिका

Jaipur Jewellery Robbery Case इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शहरी पुलिसिंग में इंटीग्रेटेड सर्विलांस सिस्टम कितनी अहम भूमिका निभा सकता है। सैकड़ों कैमरों से मिली सूचनाओं को सही तरीके से विश्लेषित करना आसान काम नहीं होता, लेकिन प्रशिक्षित टीम और धैर्य के साथ यह संभव है।

जयपुर पुलिस ने इस सफलता का श्रेय उन अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया है, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर हर सुराग को गंभीरता से लिया। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि इस तरह की घटनाओं पर और तेजी से काबू पाया जा सके।

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