युवाओं में सरकारी नौकरी को लेकर कितना उत्साह और उम्मीद होती है, यह किसी से छिपा नहीं है। खासकर जब बात किसी प्रतिष्ठित सुरक्षा बल में भर्ती की हो, तो उम्मीदवार अपने सपने पूरे होते देखने लगते हैं। लेकिन कई बार इसी उम्मीद का फायदा उठाकर कुछ लोग बेरोजगार युवाओं को निशाना बना लेते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जिसमें आईटीबीपी यानी इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस में नौकरी दिलाने का लालच देकर तीन युवकों से 15 लाख रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
पीड़ितों के मुताबिक, आरोपी ने खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया जो आईटीबीपी में “सीधी भर्ती” दिलाने में सक्षम है। सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया के बारे में जानकारी कम होने का फायदा उठाते हुए उसने तीन युवाओं को विश्वास में लिया और कहा कि वह ‘‘अंदर तक सेटिंग’’ रखता है। बस, पैसों की जरूरत है और भर्ती पक्की समझो।
युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच दिया गया जिसमें अच्छी सैलरी, स्थिर करियर और फोर्स की प्रतिष्ठा का हवाला देकर उन्हें यक़ीन दिलाया गया कि थोड़े पैसे खर्च करके वे अपनी जिंदगी बदल सकते हैं। इसी भरोसे में तीनों पीड़ितों ने अपनी जमा-पूंजी, परिवार और रिश्तेदारों से उधार लेकर आरोपी को मोटी रकम दे दी।
फर्जी नियुक्ति पत्र ने खोल दी पोल
कुछ समय तक आरोपी उन्हें टालता रहा। कभी कहता मेडिकल होने वाला है, कभी लिखित परीक्षा से छूट दिला दी है, तो कभी ट्रेनिंग डेट आने वाली है। आखिरकार एक दिन उसने तीनों युवकों को “आईटीबीपी में चयन” होने का दावा करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) थमा दिए। पत्र देखकर युवाओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा — वे वर्दी पहनकर सीमाओं पर देश की सेवा करने के सपने देखने लगे।
लेकिन तभी असली झटका लगा।
जब पीड़ितों ने उन पत्रों की जांच कराई, तो पता चला कि सारे डॉक्यूमेंट पूरी तरह फर्जी थे। न सील असली थी, न हस्ताक्षर। पत्र में दी गई कोई जानकारी आईटीबीपी के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थी। इसी समय युवाओं को समझ आया कि वे एक बड़े जाल में फंस चुके हैं।
पुलिस ने की तत्काल कार्रवाई, आरोपी Arrest
जैसे ही मामला पुलिस तक पहुंचा, अधिकारियों ने देर किए बिना जांच शुरू की। पीड़ितों द्वारा दिए गए कागजात, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांज़ैक्शन की मदद से पुलिस ने आरोपी की पहचान कर ली। एक विशेष टीम बनाई गई, और छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच से यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई पूरा नेटवर्क है जो नौकरी के नाम पर ठगी करता है। अक्सर ऐसे मामलों में गिरोह के कई सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल होते हैं — कोई पीड़ित ढूंढता है, कोई सरकारी अफसर का “रोल” प्ले करता है और कोई नकली कागजात तैयार करता है।
पुलिस की अपील: “सिर्फ आधिकारिक नोटिफिकेशन पर भरोसा करें”
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सरकारी नौकरी के लिए किसी बिचौलिए, एजेंट या संदिग्ध व्यक्ति पर भरोसा न करें। सरकारी नौकरी की भर्ती हमेशा पूरा पारदर्शी और आधिकारिक माध्यमों से होती है — जैसे ऑनलाइन पोर्टल, आधिकारिक विज्ञापन और चयन बोर्ड की वेबसाइटें। कोई भी विभाग पैसे लेकर नौकरी नहीं देता।
उन्होंने कहा कि आजकल फर्जीवाड़े के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विशेष रूप से सुरक्षा बलों की भर्ती का नाम लेकर धोखा देना आम हो गया है, इसलिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है।
युवाओं की मजबूरी को अपना हथियार बनाते हैं ठग
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि किस तरह बेरोजगारी और नौकरी की चाह का फायदा उठाकर ठग युवा पीढ़ी का शोषण करते हैं। कई बार परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, लेकिन “सरकारी नौकरी मिल जाएगी” की उम्मीद में लोग कर्ज उठाकर भी पैसे दे देते हैं — और इसी विश्वास को अपराधी एक अवसर की तरह देखते हैं।
नतीजा: आरोपी जेल में, जांच जारी
ITBP Job Scam पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि उसने इससे पहले भी किसी को इस तरह ठगा है या नहीं। तीन पीड़ितों को न्याय दिलाने की कार्रवाई जारी है, और पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि ऐसा गिरोह खत्म किया जाए जो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करता है।









