नई दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। अंतरराज्यीय स्तर पर फैले एक शातिर साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो करीब 3 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी “किराए के बैंक खातों” का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को अलग-अलग राज्यों में घुमाते थे, ताकि पुलिस की नजर से बच सकें।
कैसे रची गई ठगी की साजिश
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कोई साधारण साइबर ठगी नहीं थी, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध और तकनीकी रूप से मजबूत नेटवर्क था। आरोपी खुद के बैंक खातों का इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों के खातों को किराए पर लेते थे। इसके बदले खाता धारकों को कमीशन या तय रकम दी जाती थी।
जैसे ही किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया जाता, उसकी रकम तुरंत इन किराए के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती। इसके बाद पैसे को कई खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे भेज दिया जाता, जिससे असली ठग तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था। इसी तरीके से यह गिरोह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा और करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देता रहा।
पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक पूछताछ और डिजिटल फोरेंसिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी देश के कम से कम पांच राज्यों में सक्रिय थे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन दोनों का नाम 12 से अधिक साइबर ठगी के मामलों में सामने आ चुका है। अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को जानबूझकर बिखरा कर रखा गया था, ताकि कोई एक एजेंसी पूरे नेटवर्क तक न पहुंच सके।
“मनी म्यूल” नेटवर्क की जांच
इस मामले में पुलिस अब उन लोगों की पहचान में जुटी है, जिनके बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किया गया। इन्हें साइबर अपराध की भाषा में “मनी म्यूल” कहा जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ खाता धारक जानबूझकर इस गिरोह का हिस्सा बने, जबकि कुछ लोग जल्दी पैसे कमाने के लालच में फंस गए और उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वे एक गंभीर अपराध का हिस्सा बन रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं कुछ खातों का इस्तेमाल पहचान की चोरी (Identity Theft) के जरिए तो नहीं किया गया।
गिरफ्तारी के दौरान बरामद सबूत
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई अहम डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, बैंकिंग डिटेल्स और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन सबूतों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की भी संभावना जताई जा रही है।
पुलिस रिमांड और आगे की कार्रवाई
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं। अलग-अलग राज्यों की साइबर क्राइम यूनिट्स आपस में तालमेल बनाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े हर व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
बढ़ते साइबर अपराध पर警नी
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराध किस तेजी से और कितनी चालाकी से फैल रहा है। पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने साफ कहा है कि कोई भी व्यक्ति अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या ऑनलाइन बैंकिंग डिटेल्स किसी दूसरे को न दे, चाहे बदले में कितना ही आकर्षक कमीशन क्यों न दिया जा रहा हो।
आम लोगों के लिए चेतावनी
Fraud through rented bank accounts अधिकारी बताते हैं कि कई बार आम नागरिक यह सोचकर अपने खाते किराए पर दे देते हैं कि इससे उन्हें जल्दी पैसे मिल जाएंगे, लेकिन बाद में वही खाता किसी बड़े अपराध में इस्तेमाल हो जाता है। ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी शिकंजे में आ सकता है।








