झुंझुनूं शहर में बीती रात जिस आग और धमाकों का दृश्य देखा गया, उसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। एक बड़े पार्किंग एरिया में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 18 महंगी कारों को अपनी चपेट में ले लिया। चिंगारियों के साथ गूंजे कई धमाकों ने न सिर्फ पार्किंग क्षेत्र को खाक कर दिया, बल्कि लोगों के दिलों में डर और बेचैनी भी छोड़ दी।
यह घटना यूँ ही नहीं घटी। शुरुआती जांच और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह हमला उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है जिसकी शुरुआत करीब पाँच दिन पहले हुए पेट्रोल बम हमले से हुई थी। बताया जा रहा है कि तब हमलावरों ने खुली धमकी दी थी कि वे दोबारा लौटकर बड़ी आग लगाएंगे—और उन्होंने बिल्कुल वैसा ही किया।
धमाकों से थर्राया इलाका
रात करीब 11 बजे के आसपास अचानक पार्किंग ज़ोन की ओर से तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनाई देने लगीं। लोगों ने घरों से निकलकर देखा तो आग की लपटें आसमान छू रही थीं। कई गाड़ियों के फ्यूल टैंक फटने लगे, जिससे एक के बाद एक धमाके होते गए। आग इतनी तेज़ी से फैली कि दमकल विभाग को आग पर काबू पाने में लंबा संघर्ष करना पड़ा।
दमकलकर्मियों ने पूरी रात राहत और बचाव कार्य में बिताई, लेकिन तब तक आग 18 लग्ज़री वाहनों को राख में बदल चुकी थी। इन कारों में कई हाई-एंड SUV और सेडान शामिल थीं, जो अब सिर्फ धुएँ से काली पड़ी ढांचों में बदल गईं।
सोची-समझी साज़िश की बू
प्रारंभिक जांच से साफ़ संकेत मिल रहे हैं कि यह हमला पूरी तरह से योजनाबद्ध था। पाँच दिन पहले जब इलाके में पेट्रोल बम फेंके गए थे, तब संदिग्धों ने यह कहते हुए धमकी दी थी कि अगली बार “पूरी जगह को आग में झोंक देंगे।”
बीती रात हुआ हमला उसी धमकी की भयावह पूर्ति की तरह सामने आया।
पुलिस का मानना है कि हमलावरों ने ऐसे समय को चुना जब पार्किंग क्षेत्र अपेक्षाकृत खाली और शांत रहता है, ताकि कोई प्रतिरोध खड़ा न हो सके। कारों के बीच आग फैलने की गति देखकर लगता है कि हमले के दौरान ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
यह सिर्फ शरारत या छोटी-मोटी तोड़फोड़ नहीं थी—18 महंगी कारों को एक साथ निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि हमलावरों का उद्देश्य न केवल आर्थिक नुकसान पहुँचाना था, बल्कि पूरे समुदाय में दहशत पैदा करना भी था।
पुलिस हरकत में, क्षेत्र को सील किया गया
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत इलाके को सील कर दिया और फॉरेंसिक टीम को मौके पर तैनात कर दिया। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज जुटाई जा रही है ताकि संदिग्धों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह हमला स्थानीय स्तर पर सक्रिय असामाजिक तत्वों का काम लग रहा है। यह भी जांच की जा रही है कि आखिर पाँच दिन पहले हुए धमकी भरे हमले के बाद सुरक्षा को और कड़ा क्यों नहीं किया गया।
लोगों में चिंता, प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव
जहां आग बुझाई जा रही थी, वहाँ आसपास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। हर किसी के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा—
“पाँच दिन पहले ही पेट्रोल बम का मामला हुआ था। सभी डरे हुए थे, लेकिन इतनी बड़ी घटना फिर से हो जाएगी, इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।”
लोग अब प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि जब पहले ही आगाह किया गया था, तो इलाके की सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई।
इसी के बीच स्थानीय व्यापारियों और वाहन मालिकों में भारी नाराज़गी है। कारें जलने से लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। कई कार मालिक शॉक में हैं कि उनकी पूरी कमाई, उनकी लग्ज़री गाड़ियाँ कुछ ही मिनटों में खाक हो गईं।
प्रशासन की सफ़ाई और आश्वासन
घटना के बाद जिला प्रशासन ने लोगों को आश्वस्त किया है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उच्च अधिकारियों ने कहा है कि इस मामले को “हाई-प्रायोरिटी” के रूप में लिया गया है और दोषियों को सख्त सज़ा दिलाई जाएगी।
पुलिस ने यह भी बताया कि हमले के पीछे संभवतः किसी पुराने विवाद या गैंग rivalry का हाथ हो सकता है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
एक शहर, जो अब सुरक्षा की माँग कर रहा है
Fire wreaks havoc in Jhunjhunu लगातार दो बड़ी वारदातों के बाद झुंझुनूं के लोग अब साफ़ तौर पर सुरक्षा को लेकर बेचैनी महसूस कर रहे हैं।
घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि पेट्रोल बम हमले के बाद सख्त कदम उठाए गए होते, तो शायद यह बड़ा नुकसान टाला जा सकता था।
फिलहाल, जली हुई महंगी कारों की काली पड़ी लाइनें इस बात की याद दिलाती खड़ी हैं कि अपराधियों का इरादा कितना खतरनाक था।
झुंझुनूं के लोग अब केवल एक ही उम्मीद लगाए बैठे हैं—अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी और शहर में फिर से भरोसे और सुरक्षा का माहौल।









