किसान नेता की पत्नी पर जानलेवा हमला, सिर में गंभीर चोट — न्याय की मांग पर थाने के बाहर आमरण अनशन

Farmer leader's wife attacked, seriously injured in head attack – hunger strike outside police station demanding justice

उदयपुरवाटी (राजस्थान) — झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी कस्बे में मंगलवार को घटित एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। प्रसिद्ध किसान नेता धन्नाराम सैनी की पत्नी पर हुआ जानलेवा हमला न सिर्फ ग्रामीणों में आक्रोश का कारण बना, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर गया है। बताया जा रहा है कि महिला पर हमला करने वालों ने उसके सिर पर गंभीर चोट पहुंचाई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर अडिग है और थाने के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया गया है।

घटना का सिलसिला और पृष्ठभूमि

यह हमला किसी आकस्मिक झगड़े का परिणाम नहीं था, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद का विस्तार माना जा रहा है। किसान नेता धन्नाराम सैनी पहले भी कुछ लोगों के खिलाफ मारपीट के मामलों में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी पक्ष ने लगातार धमकियां दी थीं, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता के कारण उनके हौसले बुलंद हो गए। मंगलवार को उसी रंजिश के चलते सैनी की पत्नी पर हमला कर दिया गया।

परिवार का कहना है कि हमले के समय महिला अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थी, तभी दो लोगों ने अचानक पीछे से उस पर वार किया। सिर पर चोट लगने के कारण वह बेहोश होकर गिर पड़ी। पड़ोसियों की सूचना पर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि चोट गंभीर है लेकिन फिलहाल स्थिति स्थिर है।

आक्रोश और अनशन की शुरुआत

घटना के कुछ ही घंटों में स्थानीय लोग और किसान संगठनों के सदस्य एकजुट हो गए। सैकड़ों ग्रामीणों ने थाने के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। किसान नेता धन्नाराम सैनी स्वयं समर्थकों के साथ थाने के सामने धरने पर बैठ गए और ऐलान किया कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।

धरने के दौरान सैनी ने कहा, “हमने कानून पर भरोसा किया, पर जब कानून ही हमारी रक्षा नहीं कर पा रहा, तो हमें खुद सड़क पर उतरना पड़ेगा। हमारी लड़ाई केवल हमारे परिवार के लिए नहीं, बल्कि उन सभी किसानों के लिए है जिन्हें इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।”

धरने में शामिल स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने पहले दर्ज मामलों पर सख्त कार्रवाई की होती, तो शायद यह हमला टल सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और कार्रवाई का दावा

मामले की गंभीरता को देखते हुए उदयपुरवाटी थाना प्रभारी कस्तूर वर्मा स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें कई जगह दबिश दे रही हैं।

वर्मा ने कहा, “हमले का मामला बेहद संवेदनशील है। पुलिस आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करेगी और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

थाना प्रभारी के आश्वासन के बावजूद पीड़ित पक्ष ने अनशन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे तब तक नहीं उठेंगे जब तक पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती और उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जाता।

बढ़ता तनाव और पुलिस तैनाती

घटना के बाद से पूरे उदयपुरवाटी कस्बे में तनाव का माहौल है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। थाने के बाहर धरने में लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है, वहीं पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए बैरिकेडिंग कर दी है। प्रशासन ने अपील की है कि लोग शांति बनाए रखें और कानून को अपना काम करने दें।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को अब सख्ती दिखाने की जरूरत है, क्योंकि इस तरह की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल पैदा कर रही हैं। किसान संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला स्तर पर फैलाया जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सामाजिक असर

घटना के बाद राजनीतिक दलों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दी हैं। विपक्षी नेताओं ने इस हमले को कानून-व्यवस्था की विफलता बताया है। एक स्थानीय नेता ने कहा कि पुलिस यदि पहले के मामलों में निष्पक्ष जांच करती, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते। वहीं, किसान संगठनों ने इसे “किसानों की आवाज़ को दबाने की साजिश” करार दिया है।

सामाजिक संगठनों ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह की वारदातें ग्रामीण समाज में असुरक्षा की भावना को गहराती हैं। लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सज़ा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा दुस्साहस न कर सके।

न्याय की राह और उम्मीद

Deadly attack on farmer leader’s wife पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका अनशन न्याय मिलने तक जारी रहेगा। कई सामाजिक कार्यकर्ता और किसान संगठन अब इस संघर्ष में उनके साथ आ खड़े हुए हैं। थाने के बाहर अब धरना स्थल आंदोलन का केंद्र बन गया है, जहां रोजाना ग्रामीण और संगठन प्रतिनिधि पहुंच रहे हैं।

इस बीच, पुलिस की ओर से कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि वे आरोपियों की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं और जल्द ही गिरफ्तारी संभव है।

फिलहाल, उदयपुरवाटी में शांति बनाए रखने के लिए चौकसी बढ़ा दी गई है, लेकिन लोगों के दिलों में भय और असंतोष दोनों बने हुए हैं। यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे की परीक्षा बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन वास्तव में त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाता है या यह मामला भी धीरे-धीरे समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।

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