जसरापुर में साहसी चोरी: चरवाहे के बाड़े से 10 बकरियां गायब, ग्रामीणों में आक्रोश

जसरापुर में साहसी चोरी: चरवाहे के बाड़े से 10 बकरियां गायब, ग्रामीणों में आक्रोश

जसरापुर (राजस्थान) — राजस्थान के झुंझुनूं जिले के जसरापुर गांव में हुई एक अनोखी और साहसी चोरी ने पूरे इलाके को हिला दिया है। अज्ञात चोरों ने देर रात एक स्थानीय पशुपालक के बाड़े से 10 उच्च नस्ल की बकरियां चुरा लीं। यह वारदात तिरोड़ी की ढाणी, वार्ड नंबर 9 की बताई जा रही है। चोरी का यह मामला न केवल ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रहा है, बल्कि पशुपालक समुदाय के लिए यह एक बड़ा आर्थिक झटका भी साबित हुआ है।

घटना का पूरा विवरण

पीड़ित पशुपालक उदमीराम पुत्र ममराज गुर्जर ने बताया कि रोज़ की तरह उन्होंने रात में अपनी बकरियों को ‘रेवाड़े’ (बाड़े) में बांधा और सोने चले गए। सुबह जब वे उठे, तो उन्होंने देखा कि बाड़े का दरवाजा टूटा हुआ है और अंदर की 10 बकरियां गायब हैं। बकरियां विशेष नस्ल की थीं, जिनकी कीमत लगभग ₹1.5 लाख बताई जा रही है। यह नुकसान किसी किसान या पशुपालक के लिए बहुत बड़ा माना जाता है, क्योंकि यह उसकी रोज़मर्रा की आय और जीवनयापन पर सीधा असर डालता है।

उदमीराम ने तुरंत इस घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। उन्होंने कहा कि यह चोरी बहुत सोच-समझकर की गई लगती है, क्योंकि चोरों ने सामान्य बकरियों को छोड़कर सिर्फ सबसे कीमती जानवरों को चुना और ले गए।

चोरी कैसे हुई

जानकारी के अनुसार, चोरी देर रात अंधेरे में हुई। चोरों ने पहले बाड़े का ताला तोड़ा और फिर बड़ी सावधानी से बकरियों को बाहर निकाला ताकि कोई शोर न हो। यह भी संभावना जताई जा रही है कि चोरी में एक से अधिक व्यक्ति शामिल थे, जिन्होंने बकरियों को किसी वाहन से ले जाया होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के समय आस-पास कोई गश्त नहीं थी और इलाके में अंधेरा भी था। इससे चोरों को काम आसान हो गया। ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में पशु चोरी की घटना हुई हो। पिछले कुछ महीनों में भी आसपास के गांवों में बकरियों और भैंसों की चोरी की शिकायतें सामने आई हैं।

पुलिस की कार्रवाई

जैसे ही शिकायत दर्ज हुई, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। स्थानीय थाना प्रभारी ने बताया कि CCTV फुटेज खंगालने का काम जारी है, ताकि किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस टीम ने गांव और आस-पास के इलाकों में पूछताछ शुरू कर दी है।

थाना अधिकारी ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने रात में एक सफेद पिकअप वैन को गांव के बाहरी हिस्से में जाते देखा था। पुलिस अब उस दिशा में भी जांच कर रही है कि क्या वही वाहन चोरी की वारदात में इस्तेमाल हुआ।

इसके अलावा, पुलिस ने स्थानीय मुखबिरों को सक्रिय किया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके। जांच टीम ने कहा कि वे “हर एंगल” से केस को देख रही है — चाहे वह आपसी दुश्मनी का मामला हो, किसी गिरोह की करतूत या योजनाबद्ध चोरी।

ग्रामीणों में आक्रोश और डर

घटना की खबर पूरे गांव में फैलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सुबह से ही उदमीराम के घर पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। ग्रामीणों ने न केवल उनके नुकसान पर सहानुभूति जताई, बल्कि प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी व्यक्त की।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले कुछ समय से छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अब जब पशुओं की चोरी होने लगी है, तो यह सीधा उनके जीवनयापन पर हमला है। एक वृद्ध ग्रामीण ने कहा, “हमारा गुजारा इन जानवरों पर ही है। अगर इन्हें भी चुरा लिया जाएगा तो हम क्या खाएंगे?”

गांव वालों ने मिलकर थाने में जाकर ज्ञापन देने की भी योजना बनाई है। उन्होंने मांग की है कि पुलिस रात के गश्त को बढ़ाए, गांव के प्रवेश द्वारों पर CCTV कैमरे लगवाए जाएं और गांव की चौकीदार व्यवस्था को फिर से मजबूत किया जाए।

बकरियों की नस्ल और आर्थिक नुकसान

Daring theft in Jasrapur बताया जा रहा है कि चोरी हुई बकरियां उत्तम नस्ल की थीं, जिन्हें उदमीराम ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मेहनत और निवेश से तैयार किया था। इन बकरियों का उपयोग दूध उत्पादन और प्रजनन के लिए किया जाता था। ऐसे जानवर न केवल आर्थिक संपत्ति माने जाते हैं बल्कि ग्रामीण समाज में एक सम्मान का प्रतीक भी होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बकरी औसतन ₹15,000 से ₹20,000 की कीमत रखती है, जबकि उत्कृष्ट नस्ल की बकरियों की कीमत इससे कई गुना अधिक हो सकती है। ऐसे में कुल नुकसान लगभग ₹1.5 लाख तक पहुंचना स्वाभाविक है।

पुलिस की उम्मीदें और जांच की दिशा

पुलिस को उम्मीद है कि CCTV फुटेज से उन्हें कुछ ठोस सुराग मिलेंगे। जांच अधिकारी का कहना है कि गांव के बाहर और मुख्य सड़कों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी मांगी गई है।

थाना प्रभारी ने कहा, “हमारी टीम ने प्राथमिक साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं। जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उदमीराम की बकरियां वापस मिलें और अपराधियों को सजा मिले।”

ग्रामीणों की उम्मीद

ग्रामीण अब प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अपराधियों को जल्द पकड़ा जाएगा। वे चाहते हैं कि यह मामला मिसाल बने ताकि आगे कोई ऐसी हिम्मत न कर सके।

एक ग्रामीण महिला ने कहा, “हम दिन-रात मेहनत करके जानवर पालते हैं। चोरी हो जाने पर ऐसा लगता है जैसे हमारी मेहनत ही लूट ली गई।”

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और ग्रामीण चौकन्ने हैं। जसरापुर गांव की यह घटना फिर एक बार याद दिलाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी ज़रूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी रोजी-रोटी पशुपालन पर निर्भर है।

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