एक साधारण सी गश्त के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने पुलिसकर्मियों के साथ-साथ पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यह घटना न सिर्फ दिल दहला देने वाली है, बल्कि इंसानियत पर भरोसा भी जगाती है—क्योंकि एक पुलिस अधिकारी ने अपने कर्तव्य से बढ़कर एक नवजात की जिंदगी बचाने में जो करुणा दिखाई, वह किसी मिसाल से कम नहीं।
घटना की शुरुआत: जब रोने की आवाज़ ने ध्यान खींचा
यह घटना स्थानीय शमशान घाट के पास की है, जहाँ अक्सर शाम के समय सन्नाटा ही रहता है। लेकिन उसी खामोशी के बीच अचानक एक तेज़, दर्दभरी रोने की आवाज़ सुनाई दी। आसपास मौजूद कुछ लोगों ने जैसे ही आवाज़ का स्रोत खोजने की कोशिश की, उन्हें मिट्टी में लिपटा, बेहद नाज़ुक और कमजोर एक नवजात शिशु दिखा।
शिशु की हालत देखकर किसी का भी दिल पसीज जाता—वह पूरी तरह भीगा हुआ था, मिट्टी से ढका हुआ, और लगातार ठंड से काँप रहा था। भूख और ठंड ने उसके छोटे-छोटे शरीर को जैसे थका दिया था, लेकिन उसकी रोने की आवाज़ में अब भी जीवित रहने की अद्भुत उम्मीद झलक रही थी।
सूचना मिलते ही नज़दीकी थाने से SHO तुरंत मौके की ओर रवाना हुए। एक नवजात को ऐसी जगह पर छोड़ जाना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक हिलाने के लिए काफी है। और यही हुआ।
SHO का मानवीय फैसला: इंसानियत ने जीत ली औपचारिकता पर
मौके पर पहुँचते ही SHO ने बच्चे की हालत देखी। वह ठंड से सिकुड़ चुका था, शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था, और मिट्टी में पड़ा असहाय बच्चे को देखकर SHO एक पल के लिए भी स्थिर नहीं रह पाए।
अक्सर ऐसे मामलों में नियम यह कहते हैं कि मेडिकल टीम के आने तक इंतज़ार किया जाए। लेकिन SHO ने उस पल यह नहीं सोचा कि नियम क्या कहते हैं—उन्होंने सिर्फ इतना सोचा कि ये मासूम अगर एक पल और इसी हालत में रहा तो उसकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने बिना देर किए नवजात को उठा लिया, अपनी वर्दी से मिट्टी झाड़ी और उसे सीने से लगाकर गर्माहट देने लगे। यह दृश्य हर किसी के दिल को छू गया।
वर्दी पहनने वाले कई अधिकारी हर दिन कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं, लेकिन ऐसे मौके ही उनकी इंसानियत की गहराई को सामने लाते हैं।
जिसने भी SHO को बच्चे को अपने पास कसकर पकड़कर सान्त्वना देते देखा, उसकी आंखें नम हुए बिना नहीं रह सकीं।
अस्पताल में भर्ती: डॉक्टरों ने बताया बच्चे की हालत
SHO ने तुरंत सरकारी एंबुलेंस बुलवाई और नवजात को अस्पताल ले जाया गया। रास्ते भर SHO बच्चे को अपनी गोद में संभाले रहे, ताकि वह थोड़ी सुरक्षा महसूस कर सके।
अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की, जिसमें पता चला कि बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित था। डिहाइड्रेशन और भूख ने उसकी स्थिति नाज़ुक कर दी थी। हालांकि timely rescue होने की वजह से स्थिति को स्थिर किया जा सका।
डॉक्टरों ने बच्चे को इन्क्यूबेटर में रखकर आवश्यक चिकित्सा शुरू की। टीम ने बताया कि अगले 48 घंटे उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल बच्चा सुरक्षित हाथों में है और धीरे-धीरे उसकी हालत सुधर रही है।
पुलिस की जांच शुरू: आखिर इतनी बड़ी बेरहमी किसने की?
नवजात को इस हालत में छोड़ने की घटना ने पुलिस को भी हिला दिया। SHO ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई और जांच शुरू की गई। आसपास के कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्होंने किसी संदिग्ध व्यक्ति को उस क्षेत्र में घूमते देखा था।
ऐसे मामलों में सबसे कठिन हिस्सा यही होता है कि जिम्मेदार व्यक्ति को पहचान पाना मुश्किल होता है। लेकिन पुलिस लगातार पुरज़ोर कोशिश कर रही है कि बच्चे को इस हालत में छोड़ने वाले को पकड़ा जाए और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
समाज की भावनात्मक प्रतिक्रिया: इंसानियत अभी जिंदा है
जब इस मामले की खबर फैली, तो पूरे इलाके में एक भावनात्मक लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर SHO की सराहना करते हुए संदेशों की बाढ़ आ गई। लोग कहने लगे कि वर्दी पहनने वाले लोग केवल कानून नहीं संभालते—वे कई बार जिंदगी भी बचाते हैं।
कई स्थानीय संगठनों ने बच्चे की आगे की देखभाल में मदद की इच्छा भी जताई है। कुछ परिवारों ने बच्चे को गोद लेने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन फिलहाल यह निर्णय बाल संरक्षण विभाग के हाथ में है।
जिस तरह SHO ने बिना अपना कर्तव्य सोचे, सिर्फ इंसानियत की आवाज पर कदम उठाया—उसने लोगों को याद दिलाया कि समाज में अच्छाई आज भी मौजूद है।
उम्मीद की रोशनी: बच्चा सुरक्षित, भविष्य की जिम्मेदारी समाज की
child welfare incident अस्पताल में अब बच्चा सुरक्षित और निगरानी में है। डॉक्टर उसकी हालत को ठीक बताते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह कुछ दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा।
इस घटना ने हम सबको सोचने पर मजबूर किया है कि समाज में ऐसे मामलों को कैसे रोका जाए और नवजातों की सुरक्षा के लिए बेहतर कदम कैसे उठाए जाएं। लेकिन फिलहाल, हर किसी के दिल में राहत की भावना है कि एक मासूम की जिंदगी बच गई।









