Uncle dupes nephew of lakhs of rupees by promising him a government job

Uncle dupes nephew of lakhs of rupees by promising him a government job

राजस्थान में सामने आए एक चौंकाने वाले मामले ने यह दिखा दिया है कि धोखाधड़ी सिर्फ बाहरी लोगों से ही नहीं, बल्कि अपने ही घर-परिवार से भी हो सकती है। सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे एक युवा को उसी के सगे चाचा ने इस कदर ठगा कि उसकी वर्षों की मेहनत की कमाई पलभर में चली गई। यह मामला न केवल आर्थिक नुकसान का है, बल्कि उस भावनात्मक टूटन का भी है, जो तब होती है जब भरोसा अपनों से ही टूट जाए।

सरकारी नौकरी का सपना और भरोसे की शुरुआत

पीड़ित युवक लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। प्रतियोगी परीक्षाओं की कड़ी मेहनत, सीमित संसाधन और परिवार की उम्मीदों के बीच वह एक स्थिर भविष्य की तलाश में था। इसी दौरान उसने अपने चाचा से सलाह ली, जिन्हें परिवार में एक समझदार और संपर्कों वाला व्यक्ति माना जाता था। चाचा ने भरोसा दिलाया कि वह “सरकारी सिस्टम” को समझते हैं और सही जगह पर बात कर नौकरी लगवा सकते हैं।

युवक को यह बात इसलिए भी सहज लगी क्योंकि सामने कोई अजनबी नहीं, बल्कि खून का रिश्ता था। चाचा ने कहा कि कुछ “प्रोसेसिंग फीस” और जरूरी खर्चों के लिए पैसे देने होंगे। शुरुआत में रकम कम बताई गई, लेकिन धीरे-धीरे अलग-अलग बहानों से लाखों रुपये ले लिए गए।

जालसाजी की पूरी साजिश

धोखाधड़ी को विश्वसनीय बनाने के लिए चाचा ने एक कदम और आगे बढ़ाया। उन्होंने युवक को एक नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) सौंपा, जो देखने में बिल्कुल असली लग रहा था। उस पर सरकारी विभाग का नाम, लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर तक मौजूद थे। पत्र में जॉइनिंग की तारीख और स्थान भी साफ-साफ लिखा था।

इस दस्तावेज़ ने युवक के सारे संदेह खत्म कर दिए। उसे लगा कि उसकी मेहनत रंग लाई है और अब उसका भविष्य सुरक्षित है। इसी भरोसे में उसने चाचा को बाकी बचे पैसे भी दे दिए। परिवार में खुशी का माहौल बन गया और युवक ने नौकरी जॉइन करने की तैयारी शुरू कर दी।

सच्चाई से सामना

निर्धारित तारीख को युवक जब संबंधित सरकारी कार्यालय पहुंचा, तो उसे लगा कि यह उसके जीवन का सबसे अहम दिन है। लेकिन जैसे ही उसने नियुक्ति पत्र कार्यालय के कर्मचारियों को दिखाया, माहौल बदल गया। अधिकारियों ने कागजात देखे और हैरानी जताई। रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन युवक का नाम किसी भी आधिकारिक सूची में नहीं मिला।

कुछ ही देर में यह साफ हो गया कि नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी है। कार्यालय के कर्मचारियों ने युवक को समझाया कि सरकारी भर्तियों में इस तरह पैसे लेकर नौकरी नहीं दी जाती और न ही कोई निजी व्यक्ति नियुक्ति पत्र जारी कर सकता है।

टूटता भरोसा और बढ़ती मुश्किलें

इस सच्चाई के सामने आते ही युवक के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत अपने चाचा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला। घर जाकर पता चला कि चाचा वहां भी नहीं हैं। तब जाकर उसे एहसास हुआ कि उसके साथ एक सुनियोजित धोखाधड़ी की गई है।

युवक न केवल आर्थिक रूप से टूट चुका था, बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे सदमे में था। जिस व्यक्ति पर उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया, वही उसके सपनों और बचत का दुश्मन बन गया।

पुलिस की शरण में

आखिरकार पीड़ित युवक ने पुलिस थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वे फर्जी नियुक्ति पत्र की जांच कर रहे हैं और पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत जुटाए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह धोखाधड़ी पूरी तरह योजनाबद्ध थी।

पुलिस अब आरोपी चाचा की तलाश में जुटी है और यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने इससे पहले भी किसी और के साथ इसी तरह की ठगी की है।

नौकरी चाहने वालों के लिए चेतावनी

यह मामला उन हजारों युवाओं के लिए एक कड़ी चेतावनी है, जो सरकारी नौकरी पाने की चाह में किसी भी तरह के वादों पर भरोसा कर लेते हैं। प्रशासन लगातार यह दोहराता रहा है कि सरकारी भर्तियां पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होती हैं—लिखित परीक्षा, मेरिट लिस्ट और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से।

किसी भी सरकारी नौकरी के लिए यदि कोई व्यक्ति पैसे की मांग करता है, “अंदर की सेटिंग” या “पक्की नौकरी” का दावा करता है, तो वह साफ तौर पर धोखाधड़ी का संकेत है। न तो नियुक्ति पत्र निजी तौर पर दिए जाते हैं और न ही किसी रिश्तेदार या एजेंट के जरिए नौकरी लगाई जाती है।

समाज के लिए सबक

Cheating in the name of government job इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की होड़ किस तरह लोगों को कमजोर बना देती है। जब अपनों से ही धोखा मिलता है, तो भरोसे की नींव हिल जाती है। जरूरी है कि युवा सही जानकारी के साथ आगे बढ़ें, आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी लालच में आकर अपनी मेहनत की कमाई दांव पर न लगाएं।

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