सीबीएसई में देशभर की टॉपर बनी शामली की सावी जैन, 499 अंक लाकर रचा इतिहास

CBSE mein deshbhar ki topper bani Shamli ki Savi Jain, 499 ank laakar racha itihaas

उत्तर प्रदेश के शामली जिले की होनहार बेटी सावी जैन ने सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 499 अंक प्राप्त कर पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा सावी की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है।

सावी का यह सफर मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास की मिसाल है। उनके पिता एक सामान्य फर्नीचर की दुकान चलाते हैं, लेकिन बेटी ने अपनी लगन से एक असाधारण सफलता पाई है। परिवार का कहना है कि सावी शुरू से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर रही हैं। वह रोज़ाना 5 घंटे समर्पित रूप से पढ़ाई करती थीं और अब उनका सपना है कि वे UPSC की परीक्षा पास कर आईएएस बनें और देश की सेवा करें।

499 अंक: मेहनत का नतीजा, ना कि संयोग

सावी ने परीक्षा में 499 अंक लाकर यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत और अनुशासन का कोई विकल्प नहीं होता। यह परिणाम सिर्फ एक छात्रा की जीत नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़ा सपना देखते हैं। उनकी इस सफलता ने यह दिखा दिया कि दृढ़ निश्चय और समर्पण से कुछ भी संभव है।

स्कूल और शहर में खुशी की लहर

सावी की सफलता ने स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल को भी गर्व से भर दिया है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने बताया कि सावी शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं और उन्होंने हर विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। स्कूल में सावी के सम्मान में विशेष समारोह आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, पूरे शामली शहर में लोग मिठाइयाँ बांट रहे हैं और गर्व महसूस कर रहे हैं कि उनके बीच से एक राष्ट्रीय टॉपर निकली है।

सपना अब आईएएस बनने का

सावी कहती हैं कि यह तो बस पहला पड़ाव है। “मेरा सपना है कि मैं एक दिन आईएएस बनूं और समाज के लिए कुछ कर सकूं। इस सफलता ने मेरे आत्मविश्वास को और मज़बूत किया है। अब मैं पूरी लगन के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट जाऊंगी,” उन्होंने कहा।

उनका मानना है कि यदि छात्र अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें, समय का सदुपयोग करें और खुद से मुकाबला करें, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

एक साधारण परिवार से असाधारण सफर तक

सावी के पिता की एक फर्नीचर की दुकान है। एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि के बावजूद, परिवार ने कभी उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। सावी की मां भी उनकी पढ़ाई में बराबर सहयोग करती रहीं। परिवार का कहना है कि सावी शुरू से ही अनुशासित और आत्मनिर्भर रही हैं।

देश भर के छात्रों के लिए प्रेरणा

सावी जैन की यह कहानी उन सभी छात्रों के लिए एक मिसाल है जो बड़े सपने देखने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर लगन और मेहनत हो, तो सफलता दूर नहीं।

परिणाम

सावी जैन की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके स्कूल और शहर के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। उम्मीद है कि सावी जैसे और भी छात्र आगे आएँगे और देश का नाम रोशन करेंगे।

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