Debt, pressure, and conspiracy: Bank manager fabricates robbery story, hatches sinister plan to claim ₹4 crore insurance

Debt, pressure, and conspiracy: Bank manager fabricates robbery story, hatches sinister plan to claim ₹4 crore insurance

कभी-कभी हकीकत ऐसी होती है, जो किसी अपराध उपन्यास या मनोवैज्ञानिक थ्रिलर से कम नहीं लगती। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बैंक मैनेजर ने अपने ही बैंक में डकैती की साजिश रच डाली। यह कोई सामान्य बैंक लूट नहीं थी, बल्कि एक ऐसी “सेल्फ-हाइस्ट” थी, जिसके पीछे छिपी थी कर्ज़ में डूबी ज़िंदगी, मानसिक टूटन और परिवार को सुरक्षित भविष्य देने की हताश कोशिश।

जांच में खुला चौंकाने वाला सच

यह मामला तब सामने आया, जब एक स्थानीय बैंक शाखा में हुई लूट को लेकर पुलिस को कुछ असामान्य सुराग मिले। शुरुआती तौर पर यह एक सामान्य आपराधिक घटना लग रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, परतें खुलती चली गईं। पुलिस को पता चला कि बैंक की सुरक्षा में जो चूक दिखाई दे रही थी, वह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई थी।

जांच के दौरान बैंक मैनेजर को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने जो कबूलनामा किया, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। आरोपी मैनेजर ने स्वीकार किया कि उसी ने इस पूरी डकैती की योजना बनाई थी और इसके लिए बाहरी अपराधियों को किराए पर लिया था।

₹20 लाख में तय हुआ ‘लूट’ का सौदा

पुलिस के अनुसार, बैंक मैनेजर ने कुछ पेशेवर अपराधियों से संपर्क किया और उन्हें बैंक लूटने के लिए ₹20 लाख की सुपारी दी। इस रकम का उद्देश्य सिर्फ बैंक से नकदी निकलवाना नहीं था, बल्कि ऐसा माहौल बनाना था, जिससे मामला पूरी तरह असली डकैती लगे।

मैनेजर ने बैंक की आंतरिक जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था और समय-सारिणी से जुड़ी जानकारियाँ भी आरोपियों को उपलब्ध कराईं। इससे साफ हो गया कि यह कोई बाहरी हमला नहीं, बल्कि अंदर से रची गई साजिश थी।

कर्ज़ में डूबा, मानसिक तनाव से जूझता एक अधिकारी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मैनेजर लंबे समय से भारी कर्ज़ के बोझ तले दबा हुआ था। निजी निवेश, पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ और आर्थिक असफलताओं ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था। हालात ऐसे बन चुके थे कि उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था।

इसी दौरान उसने हाल ही में ₹4 करोड़ का एक बड़ा जीवन बीमा पॉलिसी लिया था। यही पॉलिसी आगे चलकर इस पूरी साजिश का केंद्र बन गई।

खौफनाक ‘एग्ज़िट प्लान’

जांच में सामने आया कि मैनेजर की योजना सिर्फ डकैती तक सीमित नहीं थी। उसने अपने जीवन के अंत को भी इस साजिश का हिस्सा बना लिया था। पुलिस के अनुसार, उसकी योजना तीन चरणों में बंटी हुई थी:

पहला चरण: बैंक में डकैती करवा कर अव्यवस्था और वित्तीय नुकसान की स्थिति पैदा करना, जिससे किसी भी अनियमितता या गड़बड़ी पर शक न जाए।

दूसरा चरण: डकैती के बाद, मानसिक आघात और परिस्थितियों से टूटकर आत्महत्या कर लेना। उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान देने की योजना बनाई थी।

तीसरा चरण: उसकी मौत को बैंक लूट से जुड़े तनाव का परिणाम दिखाया जाए, ताकि उसके परिवार को ₹4 करोड़ की बीमा राशि मिल सके और उससे सारे कर्ज़ चुकाए जा सकें।

यह योजना जितनी सुनियोजित थी, उतनी ही भयावह भी।

समय रहते पुलिस की कार्रवाई

सौभाग्य से, पुलिस को समय रहते इस साजिश की भनक लग गई। अंतिम चरण को अंजाम देने से पहले ही मैनेजर को हिरासत में ले लिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया,
“वह अत्यधिक मानसिक दबाव में था। उसे लग रहा था कि यही एकमात्र तरीका है, जिससे वह अपने परिवार को सुरक्षित भविष्य दे सकता है और कर्ज़ से मुक्ति पा सकता है।”

बरामदगी और आगे की जांच

पुलिस ने डकैती के लिए दी गई रकम का एक हिस्सा बरामद कर लिया है। साथ ही, इस साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। जिन अपराधियों को सुपारी दी गई थी, उनकी तलाश तेज़ कर दी गई है।

फिलहाल आरोपी बैंक मैनेजर पर आपराधिक साजिश, विश्वासघात, और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी

Bank manager fake robbery case यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अदृश्य दबाव की भी तस्वीर पेश करता है, जो आज कई पेशेवरों, खासकर वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर होता है। कर्ज़, सामाजिक अपेक्षाएँ और असफलता का डर कई बार इंसान को ऐसे फैसलों की ओर धकेल देता है, जिनकी कल्पना भी मुश्किल है।

Scroll to Top