राजस्थान के झुंझुनू जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने समाज को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है। अंजली नाम की 24 वर्षीय युवती, जो दो साल पहले बड़े अरमानों के साथ ससुराल गई थी, अब इस दुनिया में नहीं रही। उसके माता-पिता सदमे में हैं, और पूरे इलाके में शोक की लहर है। यह मामला सिर्फ एक लड़की की मौत नहीं है, बल्कि उस सामाजिक बुराई की जीती-जागती मिसाल है जो आज भी हमारे समाज में ज़िंदा है – दहेज प्रथा।
शुरुआत थी सपनों से भरी
अंजली के पिता रोहिततास कुमार ने अपनी बेटी की शादी 30 मई 2023 को धूमधाम से की थी। उन्होंने अपनी हैसियत से बढ़कर सारा इंतज़ाम किया – एसी, फ्रिज, सोफा, बेड, स्कूटी जैसी तमाम चीजें दीं। उनका सपना था कि उनकी बेटी एक सुखी वैवाहिक जीवन जिए। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों में वह सपना टूटने लगा था।
मौत की सुबह
6 मई की सुबह 6:30 बजे अंजली की सास का फोन आया। उन्होंने कहा कि अंजली और उसका पति रविंद्र आपस में झगड़ रहे हैं। रविदास कुमार ने पहले रविंद्र से बात की, फिर अंजली से। अंजली ने कांपती आवाज़ में कहा, “पापा, ये मुझे मार देगा।” यह सुनकर रविदास कुमार घबरा गए और तुरंत उसे लेने जाने की बात कही। अंजली ने मां को बताने के लिए कहा कि पापा आ रहे हैं। लेकिन इसके बाद उसका फोन नहीं उठा। जब रविदास कुमार झुंझुनू स्थित उसके घर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी – अंजली की मौत हो चुकी थी।
संदिग्ध परिस्थितियों में गिरफ्तारी
घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने पुलिस को फोन किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रविंद्र को चिड़ावा के पास एक प्राइवेट अस्पताल से गिरफ्तार कर लिया। रविदास कुमार इस बात से परेशान हैं कि जब पास में सरकारी अस्पताल मौजूद था, तब रविंद्र को प्राइवेट अस्पताल क्यों ले जाया गया? उन्हें यह भी समझ नहीं आया कि उस वक्त रविंद्र के घर पर कोई नहीं था – सिर्फ उसका बूढ़ा पिता मिला और घर पर ताला लगा हुआ था।
दहेज की मांग बनी वजह?
रविदास कुमार के अनुसार, शादी के कुछ महीनों बाद ही रविंद्र का असली चेहरा सामने आने लगा था। जुलाई 2023 में उसने अंजली को छोड़ने की धमकी दी और पैसों की मांग की। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने ₹60,000 की व्यवस्था कर किसी तरह बेटी का घर बसाने की कोशिश की। इसके बावजूद रविंद्र की मांगें बढ़ती रहीं – कभी कैश, कभी नए सामान की। एक शिक्षक होते हुए भी रविंद्र ने कभी अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई।
अंजली का विरोध और अकेलापन
अंजली को अपने मायके की हालत का पता था, इसलिए वह हमेशा पति की मांगों का विरोध करती रही। लेकिन जब भी झगड़ा बढ़ता, वह कुछ समय के लिए अपने माता-पिता के घर चली जाती। फिर समाज के डर या भविष्य के सोचकर वापस लौट जाती। उसे शायद उम्मीद रही होगी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।
पुलिस जांच और न्याय की आस
रविदास कुमार ने थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। उन्होंने मांग की है कि रविंद्र का मेडिकल कराया जाए क्योंकि उसके शरीर पर भी घाव के निशान हैं, जिससे साफ है कि झगड़ा हुआ था। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त सज़ा मिले।
अंजली की ताईजी ने भी खुलकर कहा कि रविंद्र अक्सर अंजली को दहेज के लिए तंग करता था। अब पूरा परिवार टूट चुका है और उन्हें सिर्फ एक ही उम्मीद है – न्याय।
समाज के लिए एक करारा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर कब तक हमारी बेटियां दहेज की बलि चढ़ती रहेंगी? क्या एक शिक्षित समाज में भी लालच इतना बड़ा हो गया है कि एक जिंदगी की कीमत महज़ कुछ रुपयों से कम हो गई है?
यह सिर्फ अंजली की कहानी नहीं है। यह हर उस लड़की की कहानी है जो चुपचाप सहती है, लड़ती है, लेकिन कभी-कभी उस लड़ाई में हार जाती है।









