गुढ़ागौड़जी थाना क्षेत्र में वायुसेना में नौकरी दिलाने के नाम पर हुई ठगी का मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला न सिर्फ एक युवक की मेहनत की कमाई से जुड़ा है, बल्कि उन कई युवा अभ्यर्थियों के लिए भी सबक है जो नौकरी पाने की इच्छा में किसी भी भरोसेमंद दिखने वाले व्यक्ति के झांसे में आ जाते हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए फर्जी दस्तावेज़, चयन संबंधी पत्र और भर्ती प्रक्रिया के मनगढ़ंत कागज़ात तैयार कर दिए थे, जिनके दम पर उसने 5 लाख रुपये की रकम हड़प ली।
मामला कैसे शुरू हुआ?
पीड़ित युवक, जो लंबे समय से सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी कर रहा था, उसे एक परिचित के माध्यम से आरोपी के बारे में जानकारी मिली थी। आरोपी ने स्वयं को ऐसा व्यक्ति बताया जो “ऊपर तक पहुंच” रखता है और आसानी से भारतीय वायुसेना में भर्ती सुनिश्चित कर सकता है। युवक अपने करियर को लेकर उत्साहित था, ऐसे में वह आरोपी की बातों में आ गया।
कुछ बैठकों के बाद आरोपी ने युवक को कई दस्तावेज़ दिखाए—जिनमें वायुसेना का कथित चयन पत्र, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज़ और कुछ सील लगे प्रपत्र भी शामिल थे। पहली नजर में ये सभी कागज़ात वास्तविक लगते थे। युवक को लगा कि उसे एक बड़ा अवसर मिल गया है और इसी विश्वास के कारण उसने धीरे-धीरे 5 लाख रुपये आरोपी को दे दिए।
रकम लेते ही आरोपी ने कुछ दिनों में जॉइनिंग लेटर आने का भरोसा दिलाया। लेकिन समय बीतता गया और नौकरी को लेकर कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं आई। युवक ने जब लगातार जवाब मांगना शुरू किया तो आरोपी बहाने बनाने लगा—कभी फाइल अटकी होने की बात, कभी अधिकारियों की अनुपस्थिति, तो कभी प्रक्रिया में देरी का हवाला।
संदेह गहराया, मामला पहुंचा पुलिस तक
जब बहाने लगातार बढ़ने लगे और कोई वास्तविक प्रगति नहीं दिखी, तब पीड़ित को शक होना शुरू हुआ। उसने अपने स्तर पर वायुसेना की आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती संबंधी विवरण जांचा तो पता चला कि ऐसी कोई प्रक्रिया चल ही नहीं रही थी। उसके बाद उसने आरोपी द्वारा दिए गए दस्तावेजों की जांच करवानी चाही, जहां विशेषज्ञों ने उन्हें फर्जी बताया।
सच्चाई सामने आते ही युवक ने गुढ़ागौड़जी थाने में पहुंचकर पूरा मामला विस्तार से बताया और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी ने सोच-समझकर धोखाधड़ी की साजिश रची और दस्तावेज़ों को असली जैसा दिखाने के लिए काफी तैयारी की थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: आरोपी गिरफ्तार
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी। टेक्निकल सर्विलांस, फोन लोकेशन और स्थानीय सूत्रों की मदद से पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों पर नज़र रखी। कुछ ही दिनों की मशक्कत के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी से प्रारंभिक पूछताछ में ठगी की बात स्वीकार करा ली गई है। उसने स्वीकार किया कि उसने कई युवाओं को इसी तरह फंसाने की योजना बनाई थी, हालांकि अभी तक कितने लोग उसके शिकार बने, इसकी पूरी जानकारी पुलिस जुटा रही है।
थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज़ बनाना), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग) सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उसकी संपत्ति, बैंक खाते और लेन-देन की भी जांच कर रही है ताकि ठगे गए रुपये की बरामदगी हो सके।
फर्जी नौकरी दिलाने वाले गिरोह पर भी शक
जांच अधिकारियों का मानना है कि अकेला व्यक्ति इतने परिष्कृत दस्तावेज़ तैयार नहीं कर सकता, इसलिए इस बात की संभावना है कि आरोपी किसी ऐसे गिरोह से जुड़ा हो जो बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर सरकारी नौकरियों के नाम पर ठगी करता है।
ऐसे गिरोह आमतौर पर आकर्षक भाषा, नकली पहचान पत्र, सरकारी मोहर जैसे दिखने वाले स्टैम्प और चयन पत्र जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पीड़ित तुरंत विश्वास कर लेता है। इसलिए पुलिस ने आरोपी से जुड़े संपर्कों की भी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की अपील: नौकरी के नाम पर सावधानी बरतें
गुढ़ागौड़जी पुलिस ने इस मामले के बाद युवाओं और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी नौकरी के लिए केवल आधिकारिक प्रक्रियाओं और वेबसाइटों पर ही भरोसा करें। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी व्यक्ति यदि खुद को “भर्ती में मदद करने वाला” बताता है या “ऊपर तक पहुंच” का दावा करता है, तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
पुलिस ने यह भी कहा कि भर्ती से जुड़े सभी चरण—आवेदन, परीक्षा, शारीरिक परीक्षण, मेडिकल और अंतिम चयन—हमेशा पारदर्शी और केंद्रीकृत प्रक्रिया से ही होते हैं। किसी भी एजेंट, दलाल या बाहरी व्यक्ति की भागीदारी पूरी तरह अवैध और संदेहजनक मानी जाती है।









