झुंझुनूं जिले में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने अब कारागारों में तपेदिक (टीबी) की पहचान और रोकथाम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक को अपनाया है। इस नई मोबाइल स्क्रीनिंग पहल का उद्देश्य जेलों जैसे संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले स्थानों में टीबी को जड़ से खत्म करना है, जहां संक्रमण फैलने की आशंका सामान्य आबादी की तुलना में अधिक रहती है।
जेलों के भीतर डिजिटल सटीकता
अब तक टीबी की जांच के लिए पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिनमें समय अधिक लगता था और विशेषज्ञों की उपलब्धता भी जरूरी होती थी। लेकिन झुंझुनूं में शुरू की गई इस नई व्यवस्था के तहत एआई से लैस हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। ये मशीनें कैदियों के फेफड़ों की स्कैनिंग करती हैं और कुछ ही सेकंड में संभावित टीबी के लक्षणों की पहचान कर लेती हैं।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक्स-रे रिपोर्ट को तुरंत किसी रेडियोलॉजिस्ट द्वारा देखने की जरूरत नहीं पड़ती। एआई सॉफ्टवेयर को इस तरह प्रशिक्षित किया गया है कि वह फेफड़ों में मौजूद उन सूक्ष्म बदलावों को भी पहचान सके, जो टीबी की ओर इशारा करते हैं और जो अक्सर शुरुआती दौर में मानव आंख से छूट जाते हैं।
तुरंत जांच, तुरंत अगला कदम
यदि एआई सिस्टम किसी कैदी को “संदिग्ध टीबी मरीज” के रूप में चिह्नित करता है, तो मेडिकल टीम बिना देरी किए अगले चरण में पहुंच जाती है। मौके पर ही बलगम (स्पुटम) का सैंपल लिया जाता है, जिसे पुष्टिकरण जांच के लिए भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संभावित मरीज जांच या इलाज से वंचित न रह जाए।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस त्वरित प्रक्रिया से न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि संक्रमण को फैलने से पहले ही रोका जा सकता है। जेलों में, जहां कैदी एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हैं, वहां समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है।
पूरे जिले में पहुंचेगी सुविधा
जिला स्वास्थ्य विभाग इस तकनीक को केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं रख रहा है। योजना के तहत एआई स्क्रीनिंग यूनिट्स को मोबाइल रूप में तैयार किया गया है, ताकि वे पूरे जिले में आसानी से पहुंच सकें।
इस रणनीति के तहत:
- ब्लॉक स्तर पर पहुंच: मोबाइल एआई स्क्रीनिंग वाहन जिले के हर ब्लॉक में जाएंगे, जिससे दूर-दराज के इलाकों में भी जांच संभव हो सके।
- लक्षित जांच अभियान: फिलहाल प्राथमिकता जेलों में बंद कैदियों को दी जा रही है, क्योंकि यह समूह टीबी के लिहाज से अधिक संवेदनशील माना जाता है। हालांकि जरूरत पड़ने पर इन मशीनों का उपयोग अन्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
- तेज इलाज की शुरुआत: एआई की मदद से शुरुआती जांच और इलाज के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा, जिससे मरीजों को समय पर दवा मिल सकेगी।
टीबी मुक्त जिले की दिशा में कदम
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एआई को जांच प्रक्रिया में शामिल करना टीबी उन्मूलन की दिशा में एक “गेम चेंजर” साबित हो सकता है। कई बार टीबी के मरीजों में शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते या वे बिना लक्षण के भी संक्रमण फैला सकते हैं। ऐसे मामलों में एआई आधारित इमेजिंग तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है।
इस पहल से न केवल बीमारी की समय रहते पहचान हो सकेगी, बल्कि चिकित्सा स्टाफ पर काम का बोझ भी कम होगा। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अब ज्यादा समय इलाज और मरीजों की देखभाल पर दे सकेंगे, जबकि प्रारंभिक स्क्रीनिंग का काम तकनीक संभालेगी।
तकनीक और मानवता का संगम
“AI technology in Jhunjhunu jail TB testing” झुंझुनूं में शुरू हुई यह पहल इस बात का उदाहरण है कि कैसे आधुनिक तकनीक को सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जेलों में बंद कैदी समाज का एक ऐसा वर्ग हैं, जो अक्सर मुख्यधारा की स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रह जाता है। एआई आधारित यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि उन्हें भी उच्च गुणवत्ता की जांच और इलाज मिल सके।
जैसे-जैसे ये मोबाइल एआई एक्स-रे मशीनें जिले के विभिन्न ब्लॉकों में पहुंचेंगी, झुंझुनूं न केवल राजस्थान बल्कि देश के अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा। यह दिखाता है कि 2026 की उन्नत तकनीक का उपयोग कर पुराने और जटिल सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों से कैसे प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।









