रीटा चौधरी की शौर्य यात्रा: सेना और शहीदों के सम्मान में 10 किमी का पदयात्रा अभियान

Rita Choudhary ki Shourya Yatra: Sena aur Shaheedon ke Samman mein 10 KM ka Padyatra Abhiyan

झुंझुनू में हाल ही में एक विवाद सामने आया जब कुछ नेताओं ने सेना के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए। इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप, रीटा चौधरी ने 10 किलोमीटर लंबी शौर्य यात्रा निकाली, जो सिरासर कलां से झुंझुनू के शहीद स्मारक तक चली। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य था सेना के सम्मान को बढ़ावा देना और शहीदों व उनके परिवारों के प्रति सम्मान दिखाना।

शौर्य यात्रा का आयोजन और उसकी खासियत

रीटा चौधरी, जो मंडावा की विधायक हैं, ने इस यात्रा का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि यह शौर्य यात्रा देश की बेटियों और शहीदों के सम्मान में निकाली गई है। इस यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने मिलकर सेना के लिए एकजुटता दिखाई।

  • यात्रा कुल 10 किलोमीटर लंबी थी।
  • इसका मकसद था शहीदों व सेना की बेटियों का सम्मान करना।
  • यात्रा सिरासर कलां से शुरू होकर झुंझुनू के शहीद स्मारक तक पहुंची।

शौर्य यात्रा के उद्देश्य

रीटा चौधरी ने बताया कि इस यात्रा के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य थे:

  1. इंदिरा गांधी के पोखरण परमाणु परीक्षण की याद: यह यात्रा उसी दिन आयोजित की गई थी जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर भारत की वैज्ञानिक ताकत को विश्व के सामने रखा था।
  2. शहीद सुरेंद्र जी मोगा को श्रद्धांजलि: इस यात्रा का एक बड़ा मकसद शहीद सुरेंद्र जी मोगा को सम्मानित करना भी था। रीटा चौधरी ने सरकार से अनुरोध किया कि शहीद के परिवार को आर्थिक मदद बढ़ाई जाए। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्यों में शहीद परिवारों को करोड़ों रुपये का पैकेज मिलता है, लेकिन राजस्थान में सिर्फ पांच लाख ही दिए जाते हैं, जो बेहद कम है।
  3. सेना की बेटियों का सम्मान: कुछ नेताओं द्वारा सेना की बेटियों के खिलाफ किए गए अपमानजनक बयानों का विरोध इस यात्रा के माध्यम से किया गया। रीटा ने कहा, “हमारी बेटियां सेना में बेहतरीन सेवा दे रही हैं और हमें उन पर गर्व है।”
  4. युवाओं को देशभक्ति की प्रेरणा: इस यात्रा से युवाओं में देश सेवा के प्रति जोश और प्रेरणा जगाना भी एक उद्देश्य था ताकि वे सेना में भर्ती होकर राष्ट्र की सेवा कर सकें।

नेताओं के विवादित बयानों पर रीटा चौधरी का कड़ा विरोध

रीटा चौधरी ने कुछ भाजपा नेताओं के सेना के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सेना किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत देश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाना गलत है और इसे कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रीटा ने कहा, “सेना हमारे देश की शान है, और हम सबका कर्तव्य है कि हम उनका सम्मान करें।”

झुंझुनू: वीरों की धरती

रीटा चौधरी ने झुंझुनू को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां के बेटे और बेटियां देश सेवा में हमेशा अग्रणी रहे हैं। उन्होंने शहीदों और सैनिकों के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि पूरे देश को उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।

Highlights:

  • रीटा चौधरी ने 10 किमी की शौर्य यात्रा निकाली जो सिरासर कलां से झुंझुनू तक थी।
  • यात्रा का उद्देश्य शहीदों और सेना की बेटियों का सम्मान था।
  • इंदिरा गांधी के पोखरण परमाणु परीक्षण की याद में यह आयोजन किया गया।
  • शहीद सुरेंद्र मोगा के परिवार को आर्थिक मदद बढ़ाने की मांग।
  • सेना के प्रति विवादित बयानों का कड़ा विरोध और सेना की गरिमा की रक्षा।

लोगों की मांग: शहीदों के परिवारों को सम्मान

यात्रा में शामिल लोगों ने सरकार से जोर देकर कहा कि शहीद परिवारों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न किया जाए। सभी राज्यों में शहीदों के परिवारों को समान सम्मान और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि शहीदों के परिवारों को वह सम्मान मिले जो वे वाकई के हकदार हैं।

परिणाम

रीटा चौधरी की यह शौर्य यात्रा न केवल एक जागरूकता अभियान थी, बल्कि यह सेना के सम्मान और देशभक्ति की भावना को प्रबल करने वाला एक सशक्त संदेश भी थी। ऐसे कदम समाज को जोड़ते हैं और सेना के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। हमें अपने शहीदों और सैनिकों पर गर्व करना चाहिए और उनके सम्मान के लिए हमेशा आवाज उठानी चाहिए।

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