देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले वायुसेना के वीर जवान प्रकाश जांगिड़ को हाल ही में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। यह क्षण न केवल उनके पैतृक गांव बिरोल और नवलगढ़ बल्कि पूरे राजस्थान और भारतवर्ष के लिए एक भावुक अनुभव था। प्रकाश की शहादत ने हर देशवासी की आंखें नम कर दीं, लेकिन साथ ही उनके अदम्य साहस और समर्पण ने सभी को गर्व से भर दिया।
शहादत को सलाम, अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
प्रकाश जांगिड़ की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों लोग उन्हें अंतिम सलामी देने के लिए पहुंचे। गांव की गलियों से लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से आसमान गूंज उठा। लोग अश्रुपूरित आंखों से उनके पार्थिव शरीर को निहारते रहे, मानो अपने ही परिवार का सदस्य खो दिया हो।
हर कोई भावुक था — बूढ़े, जवान, बच्चे, महिलाएं — सभी के चेहरे पर गर्व के साथ-साथ गहरा शोक भी साफ झलक रहा था। गांव के बच्चों के हाथों में तिरंगे थे, और बुजुर्गों की आंखों में श्रद्धा के आंसू।
तिरंगे में लिपटा शौर्य
प्रकाश जांगिड़ को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका पार्थिव शरीर भारतीय तिरंगे में लिपटा हुआ था। वायुसेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। यह दृश्य किसी भी भारतीय के लिए गर्व और सम्मान से भर देने वाला था।
राजकीय सम्मान एक ऐसा प्रतीक है जो बताता है कि देश अपने वीरों को कभी नहीं भूलता। प्रकाश के बलिदान को न केवल सेना, बल्कि आम जनता ने भी सिर झुकाकर नमन किया।
परिवार के दुख में छिपा गर्व
प्रकाश के परिवार के लिए यह क्षण असहनीय पीड़ा से भरा था। एक मां ने अपना लाल खोया, एक पत्नी ने अपने जीवनसाथी को विदा किया, और एक छोटे बच्चे ने अपने पिता को अंतिम बार देखा। प्रकाश की मां और पत्नी के चेहरे पर गहरा दुख साफ देखा जा सकता था, लेकिन उनके शब्दों में बेटे और पति के बलिदान पर गर्व भी था।
एक मार्मिक क्षण तब आया जब प्रकाश के पिता ने अपने पोते को गोद में लिया और उसे हौसला देने की कोशिश की। छोटा बच्चा रो रहा था, लेकिन दादाजी की गोद में उसे थोड़ी शांति मिली। यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया।
गांव और राज्य का गौरव
प्रकाश जांगिड़ की वीरता सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं थी। पूरा गांव बिरोल गर्व से भर उठा। नवलगढ़ की गलियों में भी लोग उनके बलिदान को नमन कर रहे थे। राजस्थान को एक और सपूत ने गौरवान्वित किया।
स्थानीय प्रशासन और सेना के अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार को सांत्वना दी। कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रकाश के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करने और उनके परिवार की सहायता के लिए पहल करने की बात कही।
एक प्रेरणा बनकर अमर रहेंगे
प्रकाश जांगिड़ अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर जीवित रहेगा। उन्होंने जो साहस और समर्पण दिखाया, वह हर युवा को देशसेवा के लिए प्रेरित करेगा।
भारत मां का यह सपूत भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका नाम, उनकी बहादुरी और उनका त्याग हमेशा याद रखा जाएगा। जब-जब तिरंगा लहराएगा, प्रकाश जैसे वीरों की कहानियां भी गर्व से सुनाई जाएंगी।









