राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रोडवेज डिपो में एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कई कर्मचारी सालों से ड्यूटी पर आए बिना तनख्वाह उठा रहे थे। यह मामला एक शिकायत के बाद सामने आया, जिसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और रोडवेज मुख्यालय दोनों हरकत में आ गए।
शिकायत से खुलासा तक: क्या सामने आया जांच में?
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रोडवेज मुख्यालय ने तीन सदस्यों की एक विशेष जांच टीम गठित की। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि करीब 14 कर्मचारी ऐसे हैं जो वर्षों से काम पर नहीं आ रहे, लेकिन उनके वेतन हर महीने नियमित रूप से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर हो रहे थे।
जांच के दौरान मुख्य प्रबंधक गणेश कुमार शर्मा और यातायात निरीक्षक महेश कुमार को इस लापरवाही और अनदेखी के लिए जिम्मेदार माना गया है। शिकायत में यह भी उल्लेख था कि कुछ ड्राइवर और कंडक्टर हर महीने ₹15,000 की रिश्वत देकर अपनी उपस्थिति दर्शाते थे और वेतन लेते थे। जांच में यह बात सत्य पाई गई है।
कौन-कौन हैं आरोपों के घेरे में?
शिकायत में जिन कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, उनमें प्रमुख हैं:
कंडक्टर सुमेर गाबड़िया, महेंद्र चरण, सरिता धरतवाल, सुमन कटेवाल, संजय भास्कर और ड्राइवर विजय सिंह, सुरेश कुमार, विजेंद्र चौधरी, नरेंद्र झाझड़िया। जांच में इन सभी पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई है।
इसके अलावा, परिचालक विनोद कुमारी, विमला देवी, विजय सिंह जहर, रणवीर सिंह, कनिष्ठ लिपिक विजय सिंह थाकन और वरिष्ठ सहायक गौरव चौधरी को भी दोषी ठहराया गया है। इन सभी पर बिना ड्यूटी किए वेतन लेने के आरोप साबित हुए हैं।
नरेंद्र झाझड़िया पर सबसे गंभीर आरोप
इस घोटाले में सबसे गंभीर भूमिका मुख्य प्रबंधक के निजी चालक नरेंद्र झाझड़िया की बताई गई है। जांच में सामने आया कि झाझड़िया न सिर्फ ड्यूटी पर नहीं आता था, बल्कि सरकारी गाड़ी का उपयोग अपने निजी कामों के लिए कर रहा था। उसने उस गाड़ी से जीपीएस सिस्टम भी हटा दिया था ताकि उसकी हरकतों का पता न चल सके।
शिकायत के अनुसार, वह गाड़ी को राणासर नवलगढ़ स्थित अपने गांव ले जाता था। जांच टीम को इसके पुख्ता प्रमाण भी मिले हैं। यही नहीं, टीम को यह भी जानकारी मिली है कि मुख्य प्रबंधक ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए इस पूरे मामले में आर्थिक लाभ लिया है।
जानिए – GPS क्या है?
GPS यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम एक तकनीक है जिसकी मदद से किसी वाहन या वस्तु की वास्तविक लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। सरकारी गाड़ियों में GPS का होना अनिवार्य है ताकि उनके उपयोग पर नजर रखी जा सके।
अब आगे क्या?
फिलहाल, जांच रिपोर्ट पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर निलंबन, सेवा समाप्ति या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार और विभागीय अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए किस प्रकार की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था अपनाई जाए।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुटता जरूरी
झुंझुनूं रोडवेज डिपो में सामने आया यह घोटाला यह दिखाता है कि किस प्रकार सरकारी संस्थानों में लापरवाही और भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा ली हैं। आम जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली व्यवस्था में इस प्रकार की गड़बड़ियां बेहद गंभीर चिंता का विषय हैं।









