झुंझुनूं जिले में जीएसटी विभाग की टीम ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। 2.31 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले को अंजाम देने के लिए एक फर्जी कंपनी बनाई गई थी। खास बात यह है कि इस कंपनी के कागजात एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर थे, जो दुबई में रह रहा है और उसे इस पूरी साजिश की जानकारी तक नहीं थी।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
राज्य जीएसटी विभाग की इंटेलिजेंस विंग को इनपुट मिला था कि झुंझुनूं जिले में फर्जी बिलिंग के जरिए बड़ा टैक्स घोटाला किया जा रहा है। इसके बाद टीम ने इस मामले की बारीकी से जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि एक नकली कंपनी के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत तरीके से लाभ लिया गया, जिसकी कुल राशि ₹2.31 करोड़ है।
दुबई में रह रहे शख्स के नाम पर खोली गई कंपनी
सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि कंपनी के सभी दस्तावेज, जैसे PAN कार्ड, आधार कार्ड और अन्य रजिस्ट्रेशन दुबई में रहने वाले एक व्यक्ति के नाम पर थे, जिसे इस घोटाले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसने यह स्पष्ट किया है कि उसने कभी ऐसी किसी कंपनी की स्थापना नहीं की है और न ही किसी को अपने दस्तावेज इस्तेमाल करने की इजाजत दी है।
यह दर्शाता है कि साइबर धोखाधड़ी और पहचान की चोरी के जरिए किस तरह से फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा है।
जीएसटी टीम की कार्रवाई
राज्य जीएसटी इंटेलिजेंस विंग की टीम ने इस फर्जीवाड़े को बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से ट्रैक किया। जैसे ही दस्तावेजों और लेन-देन का अध्ययन किया गया, टीम को कई गड़बड़ियों के संकेत मिले। इसके बाद स्पॉट वेरिफिकेशन किया गया, जहां फर्जी कंपनी का कोई ठिकाना नहीं मिला।
टीम ने तुरंत ही कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, और इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
क्या होता है इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाला?
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंपनियां अपने खरीदे गए सामान या सेवाओं पर चुकाए गए GST को आउटपुट टैक्स से एडजस्ट करती हैं। लेकिन फर्जी कंपनियां बिना किसी असल व्यापार के फर्जी बिल बनाकर कर क्रेडिट क्लेम करती हैं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होता है।
जनता और व्यवसायियों के लिए चेतावनी
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पहचान चोरी (Identity Theft) और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बड़े स्तर पर आर्थिक अपराध संभव हैं। जीएसटी विभाग ने आम जनता और व्यापारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके दस्तावेज गलत हाथों में न जाएं।
यदि कोई व्यक्ति बिना आपकी जानकारी के आपके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लेता है, तो इससे आपके ऊपर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि अपने आधार, पैन और अन्य पहचान दस्तावेजों को सुरक्षित रखें।
आगे की जांच और कार्रवाई
विभाग ने कहा है कि इस मामले में जांच जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया जाएगा। जिन लोगों ने इस फर्जी कंपनी के जरिए लाभ उठाया है, उन्हें भी जांच के घेरे में लाया जा रहा है।
GST विभाग इस मामले को एक साइबर और आर्थिक अपराध दोनों के रूप में देख रहा है, और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर अपराधियों को पकड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
🔹 मुख्य बिंदु (Highlights):
- झुंझुनूं में फर्जी कंपनी बनाकर ₹2.31 करोड़ का GST घोटाला किया गया।
- दुबई में रह रहे व्यक्ति के नाम से दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हुआ।
- GST विभाग की इंटेलिजेंस टीम ने जांच कर फर्जीवाड़े का किया भंडाफोड़।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जी लाभ उठाया गया।
- मामले की जांच जारी, अन्य संलिप्त व्यक्तियों की हो रही पहचान।
परिणाम
यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही खतरनाक भी बन सकती है जब उसका इस्तेमाल गलत मंशा से किया जाए। उम्मीद की जाती है कि प्रशासन दोषियों को जल्द ही कानून के कठघरे में लाएगा और भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़ों पर अंकुश लगेगा।









