झुंझुनूं DTO ऑफिस में बड़ा फर्जीवाड़ा: पुराने नंबरों के खेल में करोड़ों का घोटाला, तीन अधिकारी सस्पेंड

"Jhunjhunu DTO Office mein bada farziwada: purane numbers ke khel mein karodon ka ghotala, teen adhikari suspend" "Jhunjhunu DTO Office mein bada farziwada: purane numbers ke khel mein karodon ka ghotala, teen adhikari suspend" "Jhunjhunu DTO Office mein bada farziwada: purane numbers ke khel mein karodon ka ghotala, teen adhikari suspend" "Jhunjhunu DTO Office mein bada farziwada: purane numbers ke khel mein karodon ka ghotala, teen adhikari suspend"

झुंझुनूं जिले के जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने प्रशासन और जनता दोनों को चौंका दिया है। वर्षों पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के फर्जी आवंटन के इस मामले में सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगी है। मुख्य आरोपी DTO मक्खन लाल जांगिड़ को निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरी है।

कैसे खुला घोटाले का पर्दा

बीते कुछ दिनों से झुंझुनूं के DTO कार्यालय को लेकर डंपर यूनियन के सदस्यों में भारी आक्रोश था। यूनियन ने DTO पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि रजिस्ट्रेशन और अन्य कामों के लिए सुबह 4 बजे भी रिश्वत वसूली जाती है। इसी विरोध के चलते परिवहन विभाग को पूरे मामले की जांच के आदेश देने पड़े।

जैसे ही पुरानी फाइलों की पड़ताल शुरू हुई, अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच में सामने आया कि 30-35 साल पुराने वाहनों के नंबर फिर से जारी किए गए हैं और वह भी निर्धारित प्रक्रिया के बिना।

जांच में चौंकाने वाले तथ्य

राज्य परिवहन मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद RTO ने जिले की पुरानी फाइलों की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में करीब 200 फाइलें संदिग्ध पाई गईं, जिनमें नियमों को ताक पर रखकर पुराने रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटित किए गए थे।
झुंझुनूं और खेतड़ी दोनों कार्यालयों में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई है। इसके बाद झुंझुनूं DTO मक्खन लाल जांगिड़, परिवहन निरीक्षक सुमित कुमार, खेतड़ी के BDO रमेश यादव और सहायक प्रशासनिक अधिकारी गजेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका

परिवहन विभाग को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े में और भी अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। पुरानी फाइलों में गलत हस्ताक्षर, अवैध बिक्री और फर्जी रिकॉर्ड जैसी कई अनियमितताएं पाई गई हैं। विभाग ने प्रदेश के अन्य 14 परिवहन कार्यालयों में भी जांच शुरू कर दी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी इसी तरह के घोटाले तो नहीं हो रहे।

सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान

फाइलों में की गई हेराफेरी और पुराने नंबरों की अवैध बिक्री के चलते सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच और गहराई से की जाए तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। बैकलॉग की कई फाइलों में नियमों की भारी अनदेखी की गई है।

जनता में नाराजगी, सिस्टम पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम से न केवल सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ी है। जिन लोगों ने वर्षों पहले नियमों के अनुसार गाड़ियाँ रजिस्टर करवाई थीं, वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जनता का यह भी कहना है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, ऐसी गड़बड़ियाँ बंद नहीं होंगी।

अब आगे क्या?

परिवहन विभाग ने संकेत दिए हैं कि जांच और भी गहराई से की जाएगी और जरूरत पड़ी तो CBI या अन्य जांच एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि दोषी चाहे जितने ऊँचे पद पर क्यों न हों, बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल निलंबित अधिकारियों से पूछताछ जारी है और कुछ अन्य नाम भी जांच के दायरे में हैं।

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