पाकिस्तान के लाहौर शहर में बीते दिन एक जबरदस्त धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसने न सिर्फ इलाके में बल्कि पूरे देश में खलबली मचा दी। यह धमाका लाहौर एयरपोर्ट के पास हुआ, और इसके तुरंत बाद धुएं का एक घना गुबार आसमान में फैल गया। मौके से सामने आई तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और आम जनता के बीच भय का माहौल है।
धमाके के बाद मची अफरातफरी
धमाके की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। स्थानीय लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। सायरन बजने लगे, पुलिस और सेना की गाड़ियों की आवाजाही तेज हो गई। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह धमाका किसी आतंकी हमले का हिस्सा था, कोई सुरक्षा एक्सरसाइज थी या फिर सबूतों को मिटाने की कोई अंदरूनी साजिश। लेकिन इतना जरूर है कि इससे पाकिस्तान में अफरातफरी और डर का माहौल बन गया है।
ऑपरेशन सिंदूर का असर
धमाके से पहले ही पाकिस्तान में माहौल तनावपूर्ण था। हाल ही में भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से पाकिस्तानी सेना और सरकार लगातार आशंकाओं से घिरी हुई है। उन्हें डर सता रहा है कि भारत को कहीं उनके गोपनीय ठिकानों की जानकारी न मिल गई हो। यही कारण है कि एलओसी से सटे कई इलाकों को खाली कराया जा रहा है। इन इलाकों में वे जगहें भी शामिल हैं, जो आतंकवादी गतिविधियों के लिए लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल होती हैं।
जवाब की धमकी, लेकिन किसके लिए?
पाकिस्तान सरकार की तरफ से बयान आया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे, लेकिन बड़ा सवाल यह है — अगर भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, तो उसका जवाब क्यों दिया जाएगा? क्या यह बयान यह नहीं दर्शाता कि पाकिस्तान अब भी आतंकवाद के साथ खड़ा है?
कौन है जिम्मेदार?
लाहौर में हुए इस धमाके की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है। शक की सुई कई दिशाओं में घूम रही है। यह हो सकता है कि यह कोई आतंकी हमला हो, या फिर पाकिस्तान की सेना द्वारा खुद रचा गया ड्रामा हो, जिससे दुनिया को यह दिखाया जा सके कि भारत पाकिस्तान पर हमला कर रहा है।
बलूचिस्तान जैसे इलाकों में पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह बढ़ता जा रहा है। वहां की स्थानीय बलूच आर्मी कई बार पाकिस्तानी सेना पर हमले कर चुकी है। हाल ही में बलूच आर्मी द्वारा किए गए हमले में कई पाक सैनिक मारे गए थे। अफगान सीमा पर भी स्थिति तनावपूर्ण है। वहां तालिबान समर्थक पाकिस्तान सरकार से नाराज चल रहे हैं।
आम लोगों का डर और सोशल मीडिया की सच्चाई
धमाके के बाद लाहौर की सड़कों पर भगदड़ मच गई। लोग सहमे हुए हैं, अपने घरों में दुबक गए हैं। पाकिस्तान की सेना और सरकार की नीतियों का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं सोशल मीडिया का दौर अब हर साजिश को उजागर कर सकता है। अगर यह पाकिस्तान की कोई चाल है, तो जांच के जरिए सामने आ जाएगा कि किस देश का विस्फोटक उपयोग हुआ है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन धमाकों की गहराई से जांच कर सकती हैं।
भारत की छवि एक जिम्मेदार राष्ट्र की रही है, जो आतंक के खिलाफ कार्रवाई करता है, न कि निर्दोष लोगों पर। भारत ने हमेशा नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी है, और उसका उद्देश्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की सेना अपनी कमजोर छवि को सुधारने के लिए इस तरह की रणनीति अपना सकती है। पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार पहले ही अविश्वास के संकट से जूझ रही है। ऐसे में, भारत को बदनाम करना या खुद को पीड़ित दिखाना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक चाल हो सकती है।
परिणाम
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लाहौर में हुए धमाके के पीछे कौन है, लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान एक भय के दौर से गुजर रहा है। जब तक पाकिस्तान आतंकी संगठनों को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक वहां स्थिरता और शांति स्थापित होना मुश्किल है।









