राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित ऐतिहासिक रानी सती मंदिर पर हाल ही में एक खास तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जो अपने आप में बेहद अहम मानी जा रही है। इस अभ्यास का उद्देश्य था—अगर कभी हवाई हमला होता है, तो उससे निपटने के लिए प्रशासन और आमजन कितने तैयार हैं।
ड्रिल में पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त भागीदारी रही। पूरे शहर में एक अलग ही माहौल देखने को मिला, मानो कोई आपात स्थिति हो और पूरा सिस्टम उससे जूझने को तैयार खड़ा हो।
प्रशासन ने कसी कमर, हर पहलू पर रखी बारीकी से नजर
मॉक ड्रिल को लेकर प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली थी। ड्रिल से पहले ही अधिकारियों ने रानी सती मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों का निरीक्षण किया। हर एक पहलू पर बारीकी से नजर डाली गई—चाहे वो तकनीकी व्यवस्थाएं हों, आपातकालीन सेवाएं हों या सुरक्षाबलों की तैनाती।
- बीडीके अस्पताल समेत सभी प्रमुख अस्पतालों में ऑक्सीजन और अन्य जरूरी संसाधनों की जांच की गई।
- डॉक्टरों की टीम को अलर्ट पर रखा गया ताकि किसी भी तरह की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
- पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) की टीमें अलग-अलग इलाकों में तैनात रहीं।
झुंझुनूवासियों से खास अपील: एकता और सजगता का संदेश
इस अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से भी सहयोग मांगा। प्रशासन की ओर से अपील की गई कि रात 9:45 बजे सभी अपने घरों की लाइटें बंद कर दें। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति सड़क पर है तो उसे अपनी गाड़ी या बाइक की हेडलाइट भी 15 मिनट के लिए बंद करने को कहा गया।
इस प्रतीकात्मक प्रयास का उद्देश्य था—देश की सामूहिक ताकत और एकता का संदेश देना। साथ ही, Pulwama हमले में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि भी इस ड्रिल का एक भावनात्मक पहलू था।
अस्पतालों की तैयारी: हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार
मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों की भी गंभीरता से समीक्षा की गई। बीडीके अस्पताल में विशेष फोकस रहा। यहां ऑक्सीजन सप्लाई, दवाइयों की उपलब्धता, और मेडिकल स्टाफ की तत्परता का जायजा लिया गया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को निर्देश दिए गए कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जाए।
पुलिस की सतर्कता: हर कोने पर मुस्तैदी
पुलिस विभाग ने इस मॉक ड्रिल में बेहद अहम भूमिका निभाई। जिला पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने पूरे इलाके में गश्त की और व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखा। ड्रिल के दौरान पुलिस न सिर्फ भीड़ नियंत्रण में लगी रही, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि ड्रिल की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के चले।
क्यों ज़रूरी है मॉक ड्रिल?
ऐसी मॉक ड्रिल्स केवल एक औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि ये हमें आने वाली किसी भी आपदा से निपटने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार करती हैं। इससे यह भी पता चलता है कि हमारी आपातकालीन सेवाएं और सुरक्षाबल कितना तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
“तैयारी ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी होती है।”
इस ड्रिल से लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है कि अगर भविष्य में कोई संकट आता है, तो वे घबराने की बजाय संयम और समझदारी से काम लें।
निष्कर्ष: सजग नागरिक ही देश की ताकत
झुंझुनू के रानी सती मंदिर पर हुई यह मॉक ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि हमारा प्रशासन और आम लोग किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। ऐसी कोशिशें न सिर्फ सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह भी साबित करती हैं कि जब देश का हर नागरिक सजग हो, तो कोई भी आपदा बड़ी नहीं होती।









