Fuel shortage और बढ़ती कीमतों के बीच भारत समेत कई देशों ने सप्लाई कंट्रोल और प्राइस रेगुलेशन के सख्त कदम उठाए
नई दिल्ली | 26 मार्च 2026 — West Asia में चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। इस वजह से तेल और गैस की सप्लाई पर भारी असर पड़ा है, जिससे कई देशों में कमी और महंगाई बढ़ गई है। अब दुनिया भर की सरकारें तेजी से हालात संभालने में जुटी हैं ताकि सप्लाई बनी रहे, कीमतें कंट्रोल में रहें और लोगों में असंतोष न फैले।
एशिया से लेकर यूरोप तक, सियोल, लंदन, नई दिल्ली और बीजिंग जैसे बड़े शहर इस संकट से प्रभावित हुए हैं। अचानक आई इस कमी ने सरकारों को तुरंत कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
सप्लाई कंट्रोल करने के लिए सख्त कदम
कई देशों ने ऊर्जा की सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए सीधे हस्तक्षेप शुरू कर दिया है।
- भारत ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए ईंधन सप्लाई को मैनेज किया।
- रिफाइनरियों को घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए
- इंडस्ट्री के लिए गैस सप्लाई कम की गई
- पाइप गैस वाले घरों को LPG सिलेंडर लेने से रोका गया
- साथ ही, भारत ने अपने ऊर्जा आयात देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 कर दी
- चीन ने अलग रणनीति अपनाई और रिफाइंड फ्यूल के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की कमी न हो
- जापान ने अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व को खोल दिया और 15 दिनों के उपयोग के बराबर तेल जारी किया
महंगाई से राहत देने के लिए प्राइस कंट्रोल
तेल की कीमतें बढ़ने के बाद कई देशों ने लोगों को राहत देने के लिए कदम उठाए:
- स्पेन ने €5 बिलियन का राहत पैकेज दिया और टैक्स घटाया
- पुर्तगाल और स्वीडन ने भी इसी तरह के कदम उठाए
- वियतनाम ने फ्यूल इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी हटा दी
- ताइवान ने 60% तक कीमत बढ़ोतरी खुद वहन करने का फैसला किया
- जर्मनी ने पेट्रोल पंप को दिन में एक बार से ज्यादा कीमत बढ़ाने से रोका
- ब्राजील ने डीजल टैक्स हटाया
- मोरक्को ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों को सब्सिडी दी
- ग्रीस ने मुनाफे पर सीमा लगाई और €300 मिलियन राहत पैकेज दिया
राशनिंग और इस्तेमाल पर पाबंदियां
कुछ देशों ने सीधे ऊर्जा के उपयोग पर रोक लगानी शुरू कर दी है:
- दक्षिण कोरिया ने ऑड-ईवन नियम लागू किया (गाड़ी नंबर के हिसाब से चलेंगी)
- जरूरत पड़ने पर प्राइवेट वाहनों पर भी पाबंदी लग सकती है
- बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए न्यूक्लियर रिएक्टर फिर शुरू किए गए और कोयले के उपयोग को बढ़ावा दिया गया
- स्लोवेनिया यूरोप का पहला देश बना जिसने फ्यूल राशनिंग लागू की
लंबे समय के समाधान की ओर कदम
जहां ज्यादातर देश तुरंत राहत पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं यूनाइटेड किंगडम ने इसे अवसर के रूप में लिया है:
- इंग्लैंड में नए घरों में सोलर पैनल और हीट पंप लगाना अनिवार्य किया गया
- इसका मकसद भविष्य में फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना है
कोई एक समाधान नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आधुनिक समय का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन सकता है। हर देश अपनी स्थिति के अनुसार अलग-अलग कदम उठा रहा है, लेकिन अभी तक कोई एक समाधान सामने नहीं आया है।
यह संकट एक बात साफ करता है दुनिया को सिर्फ अभी की समस्या नहीं सुलझानी है, बल्कि भविष्य के लिए ऊर्जा के नए विकल्पों पर भी तेजी से काम करना होगा।








