पिलानी में असम राइफल्स के जवान ने हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा नहीं देने का आरोप लगाते हुए नेशनल हाईवे पर धरना दिया। जवान का आरोप है

"Pilani mein Assam Rifles ke jawan ne highway nirmaan ke liye adhigrahit ki gayi zameen ka uchit muawza nahin dene ka aarop lagate hue National Highway par dharna diya. Jawan ka aarop hai."

– बोले, 900 वर्ग गज ज़मीन ली गई, पर कागज़ों में केवल 256 वर्ग दर्ज

राजस्थान के झुंझुनूं ज़िले के पिलानी कस्बे में असम राइफल्स के एक जवान ने हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई अपनी ज़मीन के उचित मुआवज़े की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है। जवान का कहना है कि सरकार ने उसके खेत की 900 वर्ग गज ज़मीन नेशनल हाईवे के लिए ले ली, लेकिन सरकारी दस्तावेज़ों में केवल 256 वर्ग गज दिखाया गया है।

यह विरोध उस समय सामने आया जब जवान ने खुद नेशनल हाईवे-709 पर बैठकर धरना शुरू किया। हाथ में तख्ती लिए, शांतिपूर्ण तरीके से बैठे इस जवान का कहना है कि उसे अब तक न तो मुआवज़े की पूरी राशि मिली है, और न ही उसके आवेदन का कोई जवाब आया है।

अधिकारियों से नहीं मिली सुनवाई, मजबूरी में धरना

पीड़ित जवान ने बताया कि उसने कई बार प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन उसे हर बार आश्वासन देकर टाल दिया गया। “मैंने ग्राम पंचायत, तहसील और कलेक्टर कार्यालय तक कई चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला,” जवान ने मीडिया से बातचीत में कहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाईवे परियोजना के दौरान अधिकारियों और ज़मीनी स्तर पर कर्मचारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों में ज़मीन की मात्रा को कम दिखाया गया, जिससे उसका आर्थिक नुकसान हुआ है।

कई महीनों से दौड़-धूप कर रहे हैं पीड़ित

धरने पर बैठे जवान ने यह भी बताया कि यह लड़ाई वो पिछले कई महीनों से लड़ रहे हैं। बार-बार प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। “मेरे पास सारे दस्तावेज़ मौजूद हैं, जिनसे यह साफ़ होता है कि मेरी कुल 900 वर्ग गज ज़मीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन जब मुआवज़े की बात आई तो सिर्फ़ 256 वर्ग गज की गणना की गई,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

परिवार की आजीविका पर भी असर

जवान का कहना है कि जिस ज़मीन का अधिग्रहण किया गया, वह उनकी खेती की मुख्य ज़मीन थी और वहीं से उनका परिवार आजीविका चलाता था। “मुआवज़ा ही अगर सही न मिले तो परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा?” जवान की आवाज़ में साफ़ दर्द झलकता है।

स्थानीय लोगों का भी मिला समर्थन

धरने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के कई लोग भी जवान के समर्थन में आ गए। लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की और मांग की कि पीड़ित को तुरंत न्याय मिले।

प्रशासन का कहना – जांच के बाद होगा फैसला

इस मामले में स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उपखंड अधिकारी ने बताया कि उन्हें जवान की शिकायत मिली है और वे इस मामले की जांच करवा रहे हैं। “अगर दस्तावेज़ों और ज़मीन के नक्शों में अंतर पाया गया, तो निश्चित तौर पर मुआवज़े में सुधार किया जाएगा,” उन्होंने कहा।

धरना अभी जारी, जवान बोले- न्याय मिलने तक नहीं हटूंगा

फिलहाल धरना जारी है और जवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक उन्हें सही मुआवज़ा और इंसाफ़ नहीं मिलेगा, वे हाईवे से नहीं हटेंगे। “यह सिर्फ़ मेरी लड़ाई नहीं है, यह उन सभी किसानों और ज़मीन मालिकों की लड़ाई है जिनके साथ अन्याय हुआ है,” जवान ने कहा।

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