राजस्थान में महिला प्रोफेसर से 7 करोड़ की ठगी करने वाले दो और साइबर अपराधी पकड़े गए, CBI ने मुंबई से दबोचा, हाईटेक गैजेट्स भी बरामद

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राजस्थान के बहुचर्चित साइबर ठगी मामले में एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। बिट्स पिलानी की महिला प्रोफेसर से करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले गैंग के दो और सदस्यों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। ये आरोपी प्रोफेसर को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखकर तीन महीने तक उनसे 7.67 करोड़ रुपये ऐंठते रहे।

इस केस में अब तक कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसी ने दोनों को कोर्ट में पेश कर 8 दिन की रिमांड भी हासिल कर ली है। मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और यह साफ होता जा रहा है कि यह एक सुनियोजित और हाईटेक साइबर ठगी की वारदात थी, जिसमें अत्याधुनिक गैजेट्स और सायकोलॉजिकल ट्रिक्स का इस्तेमाल किया गया।

कैसे हुई थी करोड़ों की ठगी?

यह मामला तब सामने आया जब पिलानी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई कि उन्हें पिछले कुछ महीनों से कुछ अज्ञात कॉल्स आ रहे थे, जिनमें कॉल करने वाले खुद को CBI, मुंबई पुलिस, और बैंक अधिकारी बता रहे थे। आरोपियों ने पीड़िता को यह यकीन दिलाया कि उनके बैंक खाते और डॉक्यूमेंट्स मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी से जुड़े हुए हैं।

डर और दबाव में आई प्रोफेसर ने जब मामले की जानकारी साझा करने से परहेज किया, तो साइबर ठगों ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया। उन्होंने वीडियो कॉल्स, फर्जी दस्तावेज, और नकली आईडी के जरिए प्रोफेसर को भरोसे में लिया और उनके पूरे बैंकिंग सिस्टम पर नियंत्रण बना लिया।

तीन महीनों तक ये गिरोह प्रोफेसर को निगरानी में रखकर धीरे-धीरे 7 करोड़ 67 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाता रहा।

CBI की कार्रवाई

CBI ने पीड़िता की शिकायत के बाद तत्काल कार्रवाई शुरू की। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि मामला किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि देशभर में फैले साइबर क्राइम नेटवर्क से जुड़ा है।

मुंबई से गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी पेशेवर साइबर अपराधी हैं, जिनके पास से अत्याधुनिक मोबाइल फोन, लैपटॉप, फर्जी सिम कार्ड और वर्चुअल नंबर चलाने वाले डिवाइसेज़ बरामद हुए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी से गिरोह के बाकी सदस्यों और अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जानकारी मिल रही है।

हाईटेक गैजेट्स का इस्तेमाल

CBI को आरोपियों के पास से कई ऐसे गैजेट्स मिले हैं, जिनसे वे वर्चुअल नंबर और क्लोनिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके फर्जी कॉल्स और मैसेज भेजते थे। इनके पास से इंटरनेशनल कॉल फॉरवर्डिंग सिस्टम, आईपी हैकिंग टूल्स और एन्क्रिप्टेड चैटिंग ऐप्स भी बरामद हुए हैं।

जांच एजेंसी का कहना है कि ये आरोपी इतने प्रोफेशनल थे कि इनका नेटवर्क सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड्स से भी जुड़े होने की आशंका है।

महिला प्रोफेसर की मानसिक स्थिति

पीड़िता महिला प्रोफेसर फिलहाल मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने खुद को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए सब कुछ किया, क्योंकि उन्हें यकीन हो गया था कि वे किसी बड़े मामले में फंस चुकी हैं।

अब जब मामला सामने आ चुका है, तो देशभर में ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है। सोशल मीडिया पर लोग इस केस को लेकर सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं।

पुलिस और साइबर सेल को मिल रही है मदद

CBI इस मामले में साइबर सेल और विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है। फिलहाल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ होगा।

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