झुंझुनू में ट्रांसपोर्ट यूनियन बनाम प्रशासन: 2 करोड़ के चालान पर मचा घमासान, धरना और चक्का जाम की चेतावनी

झुंझुनू में ट्रांसपोर्ट यूनियन बनाम प्रशासन: 2 करोड़ के चालान पर मचा घमासान, धरना और चक्का जाम की चेतावनी

राजस्थान के झुंझुनू जिले में इन दिनों सड़कें सिर्फ गाड़ियों से नहीं, बल्कि नाराज़गी और विरोध की गूंज से भी भरी हुई हैं। ट्रांसपोर्ट यूनियन और प्रशासन के बीच टकराव की वजह बना है एक 2 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चालान, जिसे यूनियन ने पूरी तरह से अनुचित करार दिया है।

जहां यूनियन इसे अन्याय बता रही है, वहीं प्रशासन का दावा है कि चालान नियमों के अनुसार जारी किए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर झुंझुनू में पिछले आठ दिनों से डंपर यूनियन का धरना चल रहा है, और स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।


डीटीओ ऑफिस के बाहर विरोध की तस्वीरें

झुंझुनू के डीटीओ ऑफिस के सामने सैकड़ों डंपर ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग तंबू लगाकर बैठ गए हैं। सड़क पर करीब 200 से 400 डंपर खड़े हैं, जिससे शहर में ट्रैफिक और कामकाज पर असर पड़ा है। धरने का यह आठवां दिन है और अब तक प्रशासन और यूनियन के बीच कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।


यूनियन की प्रमुख मांगें क्या हैं?

डंपर यूनियन के अध्यक्ष डॉ. सत्य प्रकाश ने बताया कि जयपुर से आरटीओ और कमिश्नर स्तर के अधिकारी उनसे मुलाकात करने आए थे। बातचीत झुंझुनू के एडीएम ऑफिस में हुई, जिसमें यूनियन ने साफ शब्दों में कहा कि जिन गाड़ियों की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) रद्द की गई है, उन्हें फिर से मान्य किया जाए।

उनका कहना है कि इन गाड़ियों से जुड़े हजारों परिवारों की रोजी-रोटी दांव पर लगी है। यूनियन प्रतिनिधि विकास नेहरा ने बताया कि अब तक सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन ठोस कोई हल नहीं दिया गया।


चालान: कितना सही, कितना गलत?

यूनियन का आरोप है कि एक-एक डंपर पर 1 लाख से लेकर 3 करोड़ तक के चालान थोपे गए हैं। कुछ मामलों में यह राशि 5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि ये चालान गलत प्रक्रिया से बनाए गए हैं — कहीं एक गाड़ी का चालान दूसरी पर लगा दिया गया, तो कहीं एक ही ट्रिप पर दो से तीन चालान काट दिए गए।

ई-रवाना की गाड़ियों का चालान भी कहीं और का बनकर दूसरी गाड़ियों पर लागू कर दिया गया है, जिससे यूनियन बेहद नाराज़ है।


बीजेपी अध्यक्ष ने दिया समर्थन

इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज़ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल राठौड़ धरनास्थल पर पहुंचे और ड्राइवरों-मोटर मालिकों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह पूरी गलती विभाग और अधिकारियों की है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पिछली सरकार ने ऐसे मामलों में चालान माफ कर दिए थे, और वह खुद इस बार भी सकारात्मक कार्रवाई करवाने की कोशिश करेंगे।


प्रशासन की दलील: कानून के दायरे में काम

अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की है। डीटीओ का दावा है कि कई चालान बॉडी कटिंग और ओवरलोडिंग के कारण काटे गए हैं, जो कि नियमों के अनुसार हैं। लेकिन यूनियन इसे मानने को तैयार नहीं है।

रोहिताश बामरा, यूनियन के एक सदस्य ने बताया कि बॉडी का नाप तय है, लेकिन जब कोई विशेष सामान जैसे माइन से निकला पत्थर या बालू लाया जाता है, तो उन्हें मजबूरी में बॉडी बढ़ानी पड़ती है। उनका तर्क है कि इसमें कोई अनियमितता नहीं है।


झुंझुनू की लोकल गाड़ियां निशाने पर?

एक और बड़ा आरोप यूनियन ने यह लगाया है कि सिर्फ झुंझुनू की लोकल गाड़ियों की आरसी रद्द की गई है, जबकि बाहर की गाड़ियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यूनियन का कहना है कि करीब 647 लोकल गाड़ियां फिलहाल खड़ी हैं, और इसका सीधा असर उनके रोजगार पर पड़ा है।


आगे क्या होगा?

यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर मांगे नहीं मानी गईं, तो वे चक्का जाम करेंगे। उनका कहना है कि जब गाड़ियां खड़ी हैं, आरसी रद्द हो चुकी है, चालान के कारण गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो रही हैं — तो फिर उनके पास सिवाय विरोध के कोई विकल्प नहीं बचा है।


निष्कर्ष

झुंझुनू में ट्रांसपोर्ट यूनियन और प्रशासन के बीच खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर है। एक तरफ यूनियन अपने हक के लिए अड़ा है, तो दूसरी ओर प्रशासन नियमों का हवाला दे रहा है। देखने वाली बात होगी कि समाधान बातचीत से निकलता है या चक्का जाम के ज़रिए दबाव बनाना पड़ता है।

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