‘भूतिया डॉक्टर’ फिर गिरफ्तार: आठवीं बार पकड़ा गया फर्जी चिकित्सक, ₹1 करोड़ की ठगी का करता था ढिंढोरा

‘Ghost Doctor’ arrested again: Fake doctor caught for the eighth time, boasting of ₹1 crore fraud

यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, लेकिन अफसोस यह हकीकत है। एक शख़्स जो खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को सालों से ठगता आ रहा था, एक बार फिर पुलिस के हत्थे चढ़ गया है — और यह उसकी आठवीं गिरफ्तारी है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह फर्जी डॉक्टर अपनी गिरफ्तारी से ज़रा भी परेशान नहीं है। वह जेल जाने को “आराम का ब्रेक” कहता है और मानो यह सब उसकी “कमाई की रणनीति” का हिस्सा हो।

धोखाधड़ी की पूरी कहानी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी को हाल ही में एक अवैध क्लिनिक चलाते हुए पकड़ा गया। वह बिना किसी मेडिकल डिग्री के वर्षों से लोगों का इलाज करने का नाटक करता आ रहा था। उसकी गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल उठा दिया है कि ऐसे अपराधी कैसे बार-बार सिस्टम की पकड़ से निकल जाते हैं।

आरोपी की पहचान अभी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक गुप्त रखी गई है। लेकिन पुलिस के अनुसार, उसका तरीका हमेशा एक जैसा रहता है — किसी छोटे कस्बे या मोहल्ले में क्लिनिक खोलना, सफेद कोट पहनकर “डॉक्टर साहब” की इमेज बनाना और फिर भोले-भाले मरीजों से मोटी रकम वसूलना।

“कितने दिन जेल में रहूँगा, उम्रकैद थोड़ी हुई है!”

जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो आरोपी का रवैया चौंकाने वाला था। एक अधिकारी ने बताया, “वह बिल्कुल बेपरवाह था। उसने हंसते हुए कहा, ‘कितने दिन रखोगे जेल में? उम्रकैद तो नहीं हुई है।’”
यह बात सुनकर जांच टीम भी हैरान रह गई कि कोई व्यक्ति, जो बार-बार पकड़ा जा चुका है, इतनी बेशर्मी से अपने अपराध को कैसे हल्के में ले सकता है।

₹1 करोड़ की सालाना ठगी का दावा

पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुद यह कबूल किया कि उसकी फर्जी ‘मेडिकल प्रैक्टिस’ उसे हर साल करीब ₹1 करोड़ की कमाई देती है।
लेकिन इस अपराध के “व्यवसायिक मॉडल” का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह था कि उसने बताया — इस कमाई का लगभग आधा हिस्सा, यानी करीब ₹50 लाख, वह जमानत और वकीलों की फीस में खर्च करता है।
उसके शब्दों में, “यह सब बिज़नेस का हिस्सा है — पकड़े जाओ, जमानत दो, फिर बाहर आकर नया क्लिनिक खोलो।”

जेल = ‘आराम की जगह’

आरोपी ने स्वीकार किया कि उसे जेल जाना कोई सज़ा नहीं लगता। उसने पुलिस को कहा, “वो तो बस थोड़ा आराम करने की जगह है। बाहर काम बहुत तनावभरा होता है।”
यानी वह जेल को ‘रिटायरमेंट ब्रेक’ की तरह देखता है।
यह बयान न केवल उसकी मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि उस खामी को भी दिखाता है जहाँ सज़ा का डर अपराध को रोकने में नाकाम हो रहा है।

कानूनी प्रणाली पर सवाल

यह मामला पुलिस और न्याय प्रणाली, दोनों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है — जब कोई व्यक्ति एक ही अपराध के लिए आठ बार पकड़ा जा चुका हो, तो फिर भी वह बार-बार वही अपराध कैसे कर पा रहा है?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों में जमानत मिलना अपेक्षाकृत आसान होता है, और जब अपराध से होने वाला लाभ सज़ा से कहीं अधिक हो, तो अपराधी के लिए यह “जोखिम भरा सौदा” नहीं बल्कि “लाभ का सौदा” बन जाता है।

जनता की सुरक्षा पर खतरा

फर्जी डॉक्टरों से सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि यह आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।
बिना योग्य डिग्री के दवाइयाँ देना या झूठे इलाज करना किसी की जान तक ले सकता है। यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि आरोपी को अपने कृत्य पर ना शर्म है, ना डर

आठवीं गिरफ्तारी, लेकिन क्या यह आखिरी होगी?

ghost doctor यह आठवीं गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की कमजोरी का आईना है जो ऐसे लोगों को बार-बार खुली छूट देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कानून में कठोर संशोधन नहीं किए जाते — जैसे दोहराए गए अपराध पर जमानत रोकना, या लंबी सज़ा का प्रावधान — तब तक ऐसे फर्जी डॉक्टरों का सिलसिला जारी रहेगा।

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