सिंघाना में साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़: दो आरोपी गिरफ्तार, सात मामलों में ₹1.65 लाख की धोखाधड़ी का खुलासा

Cyber ​​fraud racket busted in Singhana: Two accused arrested, ₹1.65 lakh fraud in seven cases revealed

सिंघाना, राजस्थान।
डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रसार के बीच साइबर अपराध भी तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं। इसी क्रम में सिंघाना थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन ठगी के सात मामलों का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर भोले-भाले लोगों को धोखे में रखकर कुल ₹1.65 लाख की अवैध वसूली करने का आरोप है। इस कार्रवाई से न केवल पीड़ितों को राहत मिली है, बल्कि क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ विश्वास भी मजबूत हुआ है।

मामला कैसे सामने आया?

पिछले कुछ महीनों से सिंघाना और आसपास के क्षेत्रों में ऑनलाइन ठगी के मामलों की शिकायतों में तेज़ी देखी गई। कई लोग मोबाइल कॉल, सोशल मीडिया लिंक, ऑनलाइन ऑफर और कस्टमर केयर नंबर के बहाने ठगे जाने लगे। शिकायतों की संख्या बढ़ने पर पुलिस ने इन मामलों की गहराई से जांच शुरू की।

थाना पुलिस ने सर्विलांस तकनीक, मोबाइल नंबरों की ट्रैकिंग, बैंक ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड और मुखबिरों की मदद से दो व्यक्तियों को चिन्हित किया, जो लगातार इस कार्य में सक्रिय पाए गए। इसके बाद एक विशेष टीम बनाकर दोनों की तलाश शुरू की गई और आखिरकार पुलिस ने उन्हें धर-दबोचा।

आरोपियों की पहचान और तरीका (Modus Operandi)

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी एक संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा हैं।
ये लोग लोगों का भरोसा जीतने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे, जैसे:

  • फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना
  • किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देना
  • ऑनलाइन शॉपिंग या कूरियर सामान फ़्री में दिलाने का लालच देना
  • सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर लिंक भेजकर ओटीपी हासिल करना
  • आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइट बनाना

एक बार पीड़ित के मोबाइल में ओटीपी या बैंकिंग जानकारी मिल जाती, तो ये लोग तुरंत खाते से पैसे ट्रांसफर कर देते थे। कई मामलों में सीधा मोबाइल वॉलेट या यूपीआई ऐप्स के जरिए रकम निकाली जाती थी, जिससे जांच करने पर असली पहचान का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

पुलिस ने क्या-क्या जब्त किया?

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से कुछ महत्वपूर्ण सबूत भी मिले हैं:

  • कई सिम कार्ड
  • एक से अधिक मोबाइल फोन
  • ऑनलाइन लेन-देन वाले भुगतान ऐप्स से जुड़ी जानकारियाँ
  • कई संदिग्ध बैंक खातों और ई-वॉलेट के रिकॉर्ड

थाना अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और केवल स्थानीय लोगों पर ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों के लोगों को भी निशाना बना रहा था।

पीड़ितों का दर्द: मेहनत की कमाई एक क्लिक में गायब

ऑनलाइन ठगी के शिकार लोग अक्सर यह कहते पाए जाते हैं कि सब कुछ इतना अचानक होता है कि समझ ही नहीं आता कि कहां गलती हुई।
एक पीड़ित ने बताया:

“मुझे लगा कि बैंक से कॉल आया है। उन्होंने खाता सुरक्षित करने के नाम पर ओटीपी मांगा और मैंने दे दिया। बस कुछ सेकंड में पैसे गायब हो गए। समझ नहीं आया कि किस पर भरोसा करें।”

ऐसी घटनाएँ आम जनता के लिए सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि भरोसे का टूटना भी है।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की योजना

सिंघाना थाना प्रभारी ने मीडिया को बताया:

“हमने मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम गठित की। तकनीकी निगरानी और ठोस सबूतों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अब उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तक भी पहुंच बनाई जा सके।”

पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि गिरोह के तार दूसरे राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए आगे की जांच में साइबर सेल और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ भी शामिल होंगी।

आम जनता को सुरक्षा संदेश

Cyber Crime in Rajasthan साइबर अपराधों से बचने के लिए पुलिस ने महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं:

क्या न करेंक्या करें
किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करेंकेवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप्स का उपयोग करें
ओटीपी, पासवर्ड या एटीएम पिन साझा न करेंसंदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और पुलिस से संपर्क करें
सोशल मीडिया पर अपनी बैंकिंग जानकारी न डालेंसाइबर सेल हेल्पलाइन 1930 याद रखें

पुलिस ने जोर देकर कहा कि “अगर कोई योजना बहुत लाभदायक लगे, तो पहले सावधानी से उसकी जांच करें, वरना आप ठगी का शिकार हो सकते हैं।”

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