33 हजार वोल्ट की चपेट में आया मासूम, प्रशासन से नाराज़ जनता बोली – अब चुप नहीं बैठेंगे!

"33 hazar volt ki chhapat mein aaya masoom, prashasan se naraaz janata boli – ab chup nahin baithenge!"

घातक लापरवाही, मासूम की ज़िंदगी दांव पर

राजस्थान के झुंझुनूं जिले की अंसारी कॉलोनी में रविवार को दिल दहला देने वाली घटना हुई। यहां 13 साल का एक मासूम बच्चा गलती से 33,000 वोल्ट की हाई वोल्टेज लाइन के संपर्क में आ गया। वह बच्चा घर के पास खेल रहा था, तभी अचानक बिजली लाइन की चपेट में आ गया और बुरी तरह झुलस गया। बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली की ये लाइनें काफी नीचे से गुजरती हैं, जिससे खतरा बना रहता है। ये पहला मामला नहीं है—इससे पहले भी इलाके में एक महिला बिजली के करंट का शिकार हो चुकी है।

गुस्साए लोगों ने दी सख्त चेतावनी

दुर्घटना के तुरंत बाद दर्जनों लोग एकत्र होकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन से जवाब माँगने लगे। स्थानीय निवासी बताते हैं कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग और प्रशासन को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

एक निवासी ने बताया कि जिस बच्चे के साथ हादसा हुआ है, उसके पिता खुद भी बीमार हैं—हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई है और वे काम करने में असमर्थ हैं। अब परिवार पर एक और बड़ा संकट टूट पड़ा है। लोगों ने बताया कि बिजली की ये हाई वोल्टेज लाइनें महज 11 से 12 फीट की ऊँचाई पर हैं, जो सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद खतरनाक है।

प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने महज कुछ दिन पहले ही खतरे को लेकर लिखित में शिकायत दी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि जब वे विभाग से संपर्क करते हैं, तो अधिकारी कहते हैं कि लाइन को नहीं हटाया जा सकता।

साथ ही लोगों ने यह भी नाराजगी जताई कि हर महीने बिजली के बिल समय से भेजे जाते हैं, लेकिन जब सुरक्षा की बात आती है तो विभाग आंखें मूंद लेता है। जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या उनकी जान की कीमत कुछ नहीं है?

मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा आंदोलन

अंसारी कॉलोनी के लोग अब एकजुट होकर सरकार और बिजली विभाग से ठोस कदम उठाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि या तो इन खतरनाक तारों को हटा दिया जाए या उन्हें सुरक्षित ऊँचाई पर ले जाया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर भूख हड़ताल और बड़ा आंदोलन करेंगे।

लोगों की एक और मांग है कि झुलसे हुए बच्चे के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए, क्योंकि पीड़ित परिवार बेहद गरीब है और इलाज के लिए सक्षम नहीं है।

सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल

यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक लोग ऐसी लापरवाही का शिकार होते रहेंगे? हाई वोल्टेज लाइनें रिहायशी इलाकों में इतनी नीचे से क्यों गुजर रही हैं? यह सिर्फ एक कॉलोनी की बात नहीं है—देशभर में ऐसे अनगिनत मामले सामने आ रहे हैं, जहां बिजली की लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है।

हर नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार है, और यह जिम्मेदारी प्रशासन और सरकारी एजेंसियों की है कि वे समय रहते ज़रूरी कदम उठाएं।

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